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Sunday, May 17, 2026
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Harish Rana Death: पंचतत्व में विलीन हुए इच्छामृत्यु पाने वाले हरीश राणा, 13 साल कोमा में रहने के बाद हुआ था निधन

लगभग 13 सालों से कोमा में रहने के बाद गाजियाबाद के हरीश राणा का मंगलवार को निधन हो गया था जिसके बाद आज उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारतीय इतिहास में पहली बार इच्छामृत्यु की इजाजत पाने वाले हरीश राणा (Harish Rana Death) का मंगलवार को निधन हो गया था। हरीश का आज दिल्ली के ग्रीन पार्क शमशान घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम संस्कार के दौरान न सिर्फ मां-बाप भावुक दिखाई दिए ब्लकि वहां मौजूद उनके रिश्तेदार और पड़ोसी भी गमगीन नजर आए। दरअसल, हरीश 13 सालों से कोमा में थे और सांस लेने के लिए पूरी तरह से मशीनों पर निर्भर थे। सुप्रीम कोर्ट की इजाजत के बाद उन्हें इच्छामृत्यु दी गई थी।

साल 2013 में हुए हादसे से नहीं उभर पाए थे हरीश (Harish Rana Death)

साल 2013 में हरीश राणा अपनी पढ़ाई के लिए चंडीगढ गए थे लेकिन वह इस बात से अंजान थे कि उनकी जीवन लीला समाप्त होने की शुरुआत यहीं से होगी। वहां वह एक हादसे का शिकार हो गए। एक रोज चंडीगढ में अपने पीजी की छत पर अपनी बहन से बात कर रहे थे जिस दौरा वह नीचे गिर गए। जिसके बाद उन्हें आनन फानन में अस्पताल ले जाया गया। लंबे उपचार के बाद वह होश में तो आ गए थे लेकिन अचेत अवस्था से नहीं उभर सके। बीते 13 सालों से हरीश राणा अचेत अवस्था में ही थे। वह केवल मशीने के सहारे सांसे ले रहे थे।

क्या होती है अचेत अवस्था?

अचेत अवस्था को विज्ञान की भाषा में क्वाड्रिप्लेजिया कंडीशन कहा जाता है। यह ऐसी अवस्था होती है जब मरीज हाथ पैरो की कोई गतिविधि नहीं कर पाता है। रोड एक्सीडेंट या अन्य हादसों में जब गर्दन, स्पाइनल कॉर्ड को चोट लगती है तो हाथ-पैर काम करना बंद कर देते हैं। इसे सर्वाइकल स्पाइनल कॉर्ड इंजरी कहते हैं। ऐसी स्थिति में मरीज क्वाड्रिप्लेजिया कंडीशन का शिकार हो जाता है।

बता दें कि सर्वोच्च अदालत ने इच्छामृत्यु का पहला ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आदेश दिया था कि इच्छामृत्यु की पूरी प्रक्रिया को संवेदनशीलता के साथ पूरा किया जाना चाहिए जिसके लिए उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती करा दिया गया था।

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