सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पत्यादिहेतवे ! तापत्रयविनाशाय श्रीकृष्णाय वयंनुम:॥ प्रभासाक्षी के श्रद्धेय पाठकों ! आज-कल हम सब भागवत कथा सरोवर में गोता लगा रहे हैं। पिछले अंक में परीक्षित के पूछने पर परमहंस श्री शुकदेव जी महाराज ने अठाइस नरकों का विस्तार से वर्णन किया। आइए अब आगे की कथा प्रसंग के क्लिक »-www.prabhasakshi.com





