नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 3 दिसंबर 2024 को लोकसभा में चीन और भारत के बीच संबधों को लेकर खुलकर बात की। एस जयशंकर ने लोकसभा में जानकारी दी कि पूर्वी लद्दाख के कई इलाकों में डिसइंगेजमेंट पूरा हो चुका है। अब भारत और चीन आगे तनाव न हो इस मुद्दे पर बात कर रहे हैं। एस जयशंकर ने लोकसभा में अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि दोनों देश LAC पर सीमा विवाद को खत्म करने के लिए दशकों से बात कर रहे हैं। जयशंकर ने कहा कि हम लोग(भारत और चीन) आपसी सहमती से LAC विवाद को हल करने के लिए सहमत हुए हैं।
भारत और चीन सीमा सहमती समझौते को मानने के लिए प्रतिबद्ध हैं
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लोकसभा में अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि मई-जून 2020 में चीन ने LAC पर भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती की थी। जिसके बाद से भारतीय सैनिकों को पेट्रोलिंग में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था। गलवान में हुई झड़प के बाद भारत और चीन के संबंध काफी खराब हो गए थे। इसके बाद से भारतीय सेना ने LAC पर भारी संख्या में हथियार और सैनिकों की तैनाती कर दी थी।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लोकसभा में अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि हमने हाल के अनुभवों को देखते हुए सीमा पर सख्ती बरती है। अब दोनों पक्षों को सख्ती से सीमा सहमति का पालन करना होगा। दोनों पक्ष (भारत और चीन) इस सीमा सहमति को मानने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
अब यहां पर सामान्य गतिविधि भी शुरू हो गई है
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आगे कहा कि 21 अक्टूबर 2024 को हुए समझौते का जिक्र उन्होंने ही चीनी विदेश मंत्री के साथ किया था। जयशंकर ने लोकसभा में कहा कि देपसांग और डेमचोक में चल रहे विवादों का जिक्र उन्होंने ही चीनी विदेश मंत्री के साथ किया था। इसके बाद ही देपसांग और डेमचोक के पारंपरिक इलाकों में गश्त शुरू हो गई है। अब यहां पर सामान्य गतिविधि भी शुरू हो गई है। जयशंकर ने लोकसभा में कहा कि मैंने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ रियो सम्मेलन में इस सीमा समझौते को लेकर खुलकर बातचीत की थी।
हम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए चीन से बात करेंगे
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लोकसभा में कहा कि लद्दाख में नई तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। जो कि यह साबित करता है कि भारत सरकार हमारे सैनिकों की मदद के लिए हमेशा तत्पर हैं। चीन के साथ हमारे रिश्ते सुधर रहे हैं। अब आगे हम चीन के साथ सीमा पर दोबारा विवाद न हो इस मुद्दे को लेकर चर्चा भी करेंगे। हम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए चीन से बात करेंगे।




