नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। लद्दाख में बढ़ते आंदोलन और हालिया हिंसा के बीच पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर लद्दाख के पुलिस महानिदेशक (DGP) एस.डी. सिंह जमवाल का बड़ा बयान सामने आया है। जिसमें डीजीपी ने आरोप लगाया है किवांगचुक की गतिविधियों में विदेशी संपर्क, भड़काऊ भाषण और शांति वार्ता को पटरी से उतारने की साज़िश शामिल रही है।
लद्दाख में बीते कुछ हफ्तों से चल रही उथल-पुथल के बीच चर्चित
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर लद्दाख के पुलिस महानिदेशक (DGP) एस.डी. सिंह जमवाल ने बड़ा दावा किया है। प्रेस वार्ता में DGP ने वांगचुक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि, उनकी गतिविधियों में न सिर्फ विदेशी संपर्कों की झलक है, बल्कि वे भड़काऊ बयानबाज़ी कर केंद्र सरकार के साथ चल रही शांति वार्ता को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे थे।
DGP का दावा – ‘हिंसा थी पूर्वनियोजित, 6 हजार लोगों ने किया हमला’
डीजीपी जमवाल ने खुलासा किया कि 24 सितंबर को केंद्र के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत से पहले लेह में जो हिंसा भड़की, वह अचानक नहीं हुई थी, बल्कि पूरी तरह से योजनाबद्ध थी। उन्होंने बताया कि, करीब 5 से 6 हजार लोगों ने सरकारी इमारतों और राजनीतिक कार्यालयों को निशाना बनाया।इस हमले में चार लोगों की जान चली गई, जबकि कई सुरक्षाकर्मी और आम नागरिक घायल हुए।
“साजिश के केंद्र में सोनम वांगचुक” पुलिस का आरोप
डीजीपी ने सीधे तौर पर वांगचुक का नाम लेते हुए कहा, कुछ तथाकथित पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने जानबूझकर माहौल को बिगाड़ा। सबसे प्रमुख चेहरा सोनम वांगचुक हैं, जो पहले भी ऐसे बयानों से प्रक्रिया को बाधित करते रहे हैं।
विदेशी कनेक्शन की जांच तेज, PAK-बांग्लादेश लिंक पर नजर
सबसे चौंकाने वाला दावा तब सामने आया जब डीजीपी ने बताया कि वांगचुक की सीमा पार यात्राओं और पाकिस्तान के अधिकारियों से कथित संपर्क की जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि, पूरी योजना और समन्वय पहले से तैयार था।अब ये देखना जरूरी है कि कहीं इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय साज़िश तो नहीं है।डीजीपी ने यह भी बताया कि नेपाल और बांग्लादेश से आए मजदूरों की भूमिका को लेकर भी संदेह है और जांच जारी है।
NSA के तहत गिरफ्तारी, जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद
सरकार ने सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया है। उन्हें शुक्रवार को लद्दाख से हिरासत में लेकर जोधपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि अगर यह कार्रवाई नहीं होती, तो स्थिति और अधिक बिगड़ सकती थी।
‘सरकार वार्ता के लिए तैयार, लेकिन अराजकता नहीं चलेगी’
डीजीपी जमवाल ने साफ किया कि केंद्र सरकार ने 6 अक्टूबर को उच्च स्तरीय वार्ता की तारीख तय कर रखी थी।लेकिन इससे पहले 10 सितंबर से शुरू हुई भूख हड़ताल को कुछ तत्वों ने राजनीतिक आंदोलन में बदलने की कोशिश की।डीजीपी ने कहा, सरकार बातचीत को लेकर गंभीर है, लेकिन हिंसा और अफवाहों के माहौल में शांति प्रक्रिया संभव नहीं है।
हिंसा की पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी: DGP
डीजीपी जमवाल के अनुसार, 24 सितंबर को केंद्र सरकार के साथ वार्ता से ठीक पहले लेह में हुई हिंसा कोई अचानक घटना नहीं थी, बल्कि पूर्व नियोजित थी। उनका दावा है कि,करीब 5 से 6 हजार लोगों ने सरकारी इमारतों और राजनीतिक दलों के कार्यालयों पर हमला बोला, जिसमें चार लोगों की मौत और कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए।
“साजिश के केंद्र में सोनम वांगचुक”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जमवाल ने कहा, कुछ तथाकथित पर्यावरण कार्यकर्ता, विशेष रूप से सोनम वांगचुक, पहले भी शांति प्रक्रिया को बाधित करने के प्रयास कर चुके हैं। इस बार भी उन्होंने वार्ता से पहले माहौल को जानबूझकर बिगाड़ा।
विदेशी संबंधों की जांच तेज, पाकिस्तान-बांग्लादेश कनेक्शन पर फोकस
पुलिस महानिदेशक ने दावा किया कि वांगचुक की सीमा पार यात्राएं और इस्लामाबाद स्थित कुछ अधिकारियों से कथित बातचीत की भी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा, पूरी योजना और समन्वय पहले से तय था। अब यह देखना होगा कि कहीं इसमें विदेशी ताकतें तो शामिल नहीं थीं। इसके अलावा, बांग्लादेश और नेपाल से आए कुछ श्रमिकों की मौजूदगी और उनकी भूमिका को लेकर भी गहन जांच जारी है।
NSA के तहत गिरफ्तारी, जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद
सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया है। उन्हें शुक्रवार को हिरासत में लेकर जोधपुर सेंट्रल जेल भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि यह कदम स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोकने के लिए जरूरी था।
सरकार वार्ता को लेकर गंभीर, मगर शांति बनी रहे जरूरी: अधिकारी
DGP ने साफ किया कि 6 अक्टूबर को केंद्र के साथ उच्च स्तरीय वार्ता तय थी, जिसके पहले 10 सितंबर से चल रही भूख हड़ताल को कुछ तत्वों ने राजनीतिक रंग दे दिया। उन्होंने कहा, सरकार वार्ता के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन ऐसे माहौल में संवाद नहीं हो सकता जहाँ हिंसा हो और साज़िशें रची जा रही हों।





