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नवरात्र में ऋषिकेश के इन दिव्य शक्तिपीठों में करें दर्शन, दुर्गा के चमत्कारी रूपों का मिलेगा साक्षात अनुभव

नवरात्र में ऋषिकेश के प्राचीन शक्तिपीठों जैसे कुंजापुरी, भद्रकाली, तारा माता और मन इच्छा देवी मंदिरों में भक्तों को माँ दुर्गा के दिव्य और चमत्कारी रूपों के दर्शन होते हैं।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। नवरात्र के पावन अवसर पर गंगा तट पर बसे ऋषिकेश में श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। यह आध्यात्मिक नगरी अपने प्राचीन देवी मंदिरों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जहां नवरात्रों के दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन को आते हैं। कुंजापुरी देवी, भद्रकाली, तारा माता, योगिनी दुर्गा, मां काली और अन्य मंदिरों में इन दिनों आस्था की अलौकिक छटा दिखाई दे रही है। आइए जानते है इन मंदिरों की खासियत के बारेमें । 

मनोकामनाएं करती हैं पूरी मन इच्छा देवी मंदिर

ऋषिकेश से करीब 5 किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच स्थित मन इच्छा देवी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। करीब 500 साल पुराने इस मंदिर का वर्णन स्कंद पुराण में भी मिलता है। यहां माँ दुर्गा की पिंडी रूप में पूजा होती है। मान्यता है कि जो भी भक्त लगातार 40 दिन मां की आराधना करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।

उत्तराखंड का प्रसिद्ध शक्तिपीठ कुंजापुरी देवी मंदिर

समुद्रतल से 1645 मीटर की ऊँचाई पर स्थित कुंजापुरी देवी मंदिर, ऋषिकेश से लगभग 25 किलोमीटर दूर है। यह स्थान देवी सती के शरीर के अंग गिरने के कारण शक्तिपीठ बना। यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त के अद्भुत दृश्य मन मोह लेते हैं। नवरात्रों में यहाँ विशेष मेले और पूजन अनुष्ठान होते हैं।

तारा माता मंदिर तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र

त्रिवेणी घाट के समीप स्थित तारा माता मंदिर को दस महाविद्याओं में दूसरी महाविद्या का दर्जा प्राप्त है। 1965 में बंगाल से लाई गई पवित्र ज्योति के साथ इस मंदिर की स्थापना हुई। यहाँ की ऊर्जा और दिव्यता साधकों और श्रद्धालुओं को विशेष अनुभव कराती है।

गौरी शंकर मंदिर 60,000 वर्षों की तपस्थली

गौरी शंकर मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। मान्यता है कि माता पार्वती ने यहाँ यमुना को ऋषि की तपस्या के लिए रोका था और स्वयं हजारों वर्षों तक यहाँ तप किया। इस तपोभूमि पर बना यह मंदिर श्रद्धा और संयम का प्रतीक है।

योगिनी दुर्गा मंदिर जहाँ गिरे माँ सती के आभूषण

योगिनी दुर्गा मंदिर भी उन शक्तिपीठों में शामिल है जहाँ माँ सती के वस्त्र और आभूषण गिरे थे। यहाँ की शक्तिशाली ऊर्जा तांत्रिक साधकों से लेकर सामान्य भक्तों तक को दिव्य अनुभूति कराती है।

भद्रकाली मंदिर रक्तबीज का वध करने वाली शक्ति का प्रतीक

भद्रकाली मंदिर में माँ को रोट और नारियल का प्रसाद अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि माँ ने इसी स्थान पर राक्षस रक्तबीज का वध कर संसार को भय से मुक्त किया था। आज यह मंदिर नवरात्रों में लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

200 साल पुरानी शक्ति स्थली माँ काली मंदिर

माँ काली मंदिर की स्थापना बंगाल से आए एक सिद्ध महात्मा ‘महादेव बाबा’ ने की थी। यहाँ माँ काली के साथ लक्ष्मी और सरस्वती की भी मूर्तियाँ विराजमान हैं। यह मंदिर ऋषिकेश की शक्तिपूजा परंपरा का अभिन्न अंग है।

श्रद्धा और शक्ति का मिलन स्थल है ऋषिकेश

नवरात्रों के दौरान ऋषिकेश की इन प्राचीन देवियों के मंदिरों में केवल पूजा नहीं होती, बल्कि यहाँ हर भक्त माँ के चमत्कारी रूपों का साक्षात अनुभव करता है। जिनके हृदय में सच्ची भक्ति है, उनकी हर पुकार यहाँ सुनी जाती है।

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