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Sunday, March 22, 2026
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खबरदार! यमुना में गणपति विसर्जन किया तो लगेगी 50 हजार की चपत, DPCC ने जारी किए निर्देश

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने गणेशोत्सव और दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों को देखते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं और कहा कि, कोई भी व्यक्ति यमुना नदी में मूर्ति विसर्जन नहीं करेगा।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । दिल्ली में यमुना नदी का दूषित पानी का मुद्दा पिछले लंबे समय से गरमाता आया है। इसे ध्‍यान में रखते हुए इस बार बीजेपी के रेखा गुप्‍ता सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए कड़ा रुख अपनाया जा रहा है। 

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने गणेशोत्सव और दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों को देखते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं और कहा कि, कोई भी व्यक्ति यमुना नदी में मूर्ति विसर्जन नहीं करेगा। आदेश के मुताबिक, ऐसा करने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यह राशि पर्यावरण क्षति शुल्क के रूप में वसूली जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार, प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP), रंग और रसायनों से बनी मूर्तियां पानी में घुलती नहीं हैं, जिससे यमुना का पानी प्रदूषित होता है और जलीय जीव-जंतु प्रभावित होते हैं। पहले से ही देश की सबसे प्रदूषित नदियों में शुमार यमुना की स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए यह कदम बेहद जरूरी माना जा रहा है।

DPCC की लोगों से खास अपील

प्रदूषण नियंत्रण समिति ने दिल्‍ली के लोगों से खास अपील की है कि, वे मूर्तियां बनाने के लिए प्राकृतिक मिट्टी का इस्तेमाल करें और विसर्जन केवल कृत्रिम तालाबों या प्रशासन द्वारा तय किए गए विशेष स्थानों पर ही करें। दिल्ली नगर निगम और अन्य एजेंसियों ने इस उद्देश्य के लिए अलग-अलग जगहों पर कृत्रिम तालाब बनाए हैं। 

…इसलिए दूषित होता है यमुना का पानी 

बता दें कि, हर साल गणेश उत्‍सव और दुर्गा पूजा के दौरान हजारों मूर्तियां यमुना में विसर्जित की जाती हैं। इनसे निकलने वाले रंग, रसायन और POP नदी के पानी की गुणवत्ता को खराब कर देते हैं। इससे न केवल जलीय जीवन पर असर पड़ता है बल्कि यह प्रदूषित पानी पीने योग्य भी नहीं रह जाता।

धार्मिक आस्था निभाना जरूरी- प्रशासन

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और पर्यावरण मंत्रालय भी बार-बार यमुना को बचाने के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दे चुके हैं। इस बार प्रशासन ने स्‍पष्‍ट किया है कि, धार्मिक आस्था निभाना जरूरी है, लेकिन इसके साथ प्रकृति और पर्यावरण की सुरक्षा भी जरुरी है।

उत्‍तर भारत के लिए अहम है नदी 

यमुना नदी दिल्ली सहित उत्तर भारत के करोड़ों लोगों के लिए जीवनरेखा है। प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं हुआ तो भविष्य की पीढ़ियों को स्वच्छ जल मिलना कठिन हो जाएगा। ऐसे में त्योहारों के अवसर पर आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाए रखना हम सबकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

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