नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत बड़ा फैसला लेते हुए अब पात्र युवाओं को स्मार्टफोन के बजाय लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से लैस टैबलेट देने का निर्णय लिया है। यह फैसला लखनऊ स्थित लोक भवन में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूर किया गया।
इस योजना को आगामी पांच वर्षों तक जारी रखा जाएगा और वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। पूरी योजना का खर्च राज्य सरकार स्वयं वहन करेगी, केंद्र की इसमें कोई भागीदारी नहीं होगी। औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने बताया कि टैबलेट, स्मार्टफोन की तुलना में तकनीकी रूप से कहीं बेहतर हैं। इनमें बड़ी स्क्रीन, लंबा बैटरी बैकअप, मल्टीटास्किंग की सुविधा और शैक्षिक व रोजगारपरक ऐप्स को आसानी से चलाने जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। इसमें वर्ड, एक्सेल, गूगल डॉक्युमेंट्स चलाना आसान है। जिससे छात्रों को पढ़ाई और करियर संबंधी कार्यों में काफी मदद मिलेगी।
युवाओं को डिजिटल संसाधनों से बनाएंगे सशक्त
मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने बताया कि टैबलेट वितरण योजना का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को उच्च स्तरीय डिजिटल संसाधनों से सशक्त बनाना है। इस पहल से युवाओं को न सिर्फ शैक्षणिक पाठ्यक्रमों की तैयारी में मदद मिलेगी, बल्कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार, तथा स्वरोजगार की दिशा में भी बेहतर तरीके से सक्षम बन पाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि तकनीकी दक्षता ही आज की युवा शक्ति को आत्मनिर्भर बना सकती है, और यही टैबलेट योजना डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सार्थक कदम है।
चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे को मिली कैबिनेट की मंजूरी
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने एक और बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना को हरी झंडी दे दी है। चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण को मंजूरी मिल गई है, जो न केवल चित्रकूट की धार्मिक महत्ता को नया आयाम देगा, बल्कि इस क्षेत्र के आर्थिक और संरचनात्मक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा। करीब 939.67 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह एक्सप्रेसवे ईपीसी मॉडल (इंजीनियरिंग-प्रोक्योरमेंट-कंस्ट्रक्शन) पर 548 दिनों में पूरा किया जाएगा।
यह एक्सप्रेसवे भरतकूप से शुरू होकर अहमदगंज तक फैलेगा, जिसकी कुल लंबाई 15.172 किलोमीटर होगी। फिलहाल इसे चार लेन में विकसित किया जाएगा, लेकिन भविष्य में इसे छह लेन तक विस्तारित करने की योजना है। यह मार्ग वाराणसी-बांदा राष्ट्रीय राजमार्ग को 135 बीजी राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ेगा, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर और तेज यातायात सुविधा मिलेगी। साथ ही, यह चित्रकूट को एक नई धार्मिक और आर्थिक पहचान दिलाने में सहायक होगा। इस परियोजना से जुड़े निर्माण और अनुरक्षण कार्यों से लगभग 38 लाख मानव दिवसों का रोजगार सृजित होने की संभावना है।
पॉलीटेक्निक संस्थानों में तकनीकी शिक्षा का बड़ा बदलाव
प्रदेश सरकार ने तकनीकी शिक्षा को उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुसार तैयार करने के उद्देश्य से एक अहम फैसला लिया है। अब राज्य के 121 सरकारी पॉलीटेक्निक संस्थानों को टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड (TTL) के सहयोग से आधुनिक तकनीकों से लैस किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 6935.86 करोड़ रुपये है, जिसमें से TTL 6034.20 करोड़ रुपये का योगदान करेगा, जबकि राज्य सरकार 1063.96 करोड़ रुपये वहन करेगी। इसके अतिरिक्त, इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास पर भी सरकार 858.11 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
इस योजना के पहले चरण में 45 पॉलीटेक्निक संस्थानों को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शामिल किया गया है। इनमें “टाटा टेक्नोलॉजी एक्सीलेंस सेंटर” की स्थापना की जाएगी, जहां छात्रों को AI, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स, डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षण मिलेगा। इस बदलाव से तकनीकी डिप्लोमा छात्रों की प्लेसमेंट संभावनाएं कई गुना बढ़ने की उम्मीद है, जिससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
महिलाओं के लिए प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन में बड़ी राहत
उत्तर प्रदेश सरकार ने महिलाओं को संपत्ति के स्वामित्व में बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब किसी महिला के नाम पर 1 करोड़ रुपये तक की संपत्ति (जैसे घर, प्लॉट आदि) खरीदने पर स्टाम्प शुल्क में 1 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। पहले यह छूट 10 लाख रुपये तक की संपत्ति पर ही उपलब्ध थी, जिसमें अधिकतम 10,000 रुपये की छूट मिलती थी। नई सीमा के साथ महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण और संपत्ति में अधिकार मिलने में मदद मिलेगी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र 11 अगस्त से
कैबिनेट की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि विधानमंडल का मॉनसून सत्र आगामी 11 अगस्त से प्रारंभ होगा। यह सत्र संविधान के अनुच्छेद 174 (1) के तहत अनिवार्य है, जिसमें दो सत्रों के बीच 6 महीने से अधिक अंतर नहीं होता। मॉनसून सत्र में उन अध्यादेशों के प्रतिस्थानी विधेयकों को पेश किया जाएगा, जो पिछले सत्र के बाद जारी किए गए थे। साथ ही, कई अन्य विधायी तथा औपचारिक कार्य भी इस दौरान पूरे किए जाएंगे।




