नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र के इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) विभाग में 1000 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा किया गया है। इस मामले में सेक्शन ऑफिसर (टेक्निकल) मुकेश सोमकुवर पर गंभीर आरोप लगे हैं। सोशल मीडिया पर आरोप वायरल होने के बाद आईटी मंत्री आशीष शेलार ने उन्हें सस्पेंड कर दिया।
अहम पद पर थे सोमकुवर
मुकेश सोमकुवर मंत्रालय में करीब दो दशक से इसी पद पर काम कर रहे थे। वे मुख्य सचिव कार्यालय में नोडल ऑफिसर थे। खास बात यह है कि पूरे राज्य में इस पद पर सिर्फ एक ही अधिकारी होता है। सरकार की हर आईटी परियोजना का टेंडर जाने से पहले तकनीकी सलाह इन्हीं से ली जाती थी।
क्या आरोप हैं?
आरोप है कि सोमकुवर ने अपनी कुर्सी का गलत इस्तेमाल किया। कई टेंडर फाइलें बिना वजह महीनों तक रोककर रखीं। सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि उन्होंने वेंडर सिलेक्शन और तकनीकी मूल्यांकन पर पूरा कंट्रोल रखा। इसी बहाने फर्जी वेंडरों और महंगे टेंडरों के जरिए 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला किया गया।
जांच कहां तक पहुँची?
विभाग ने डिपार्टमेंटल इंक्वायरी (DE) बैठा दी है। जांच में पता चलेगा कि फाइलों की देरी लापरवाही थी या फिर भ्रष्टाचार से जुड़ी थी। अगर भ्रष्टाचार साबित हुआ, तो मामला एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंपा जाएगा। फिलहाल सोमकुवर को सस्पेंड कर दिया गया है और उनकी जिम्मेदारी अलोक मिश्रा को दी गई है।
अधिकारियों का क्या कहना है?
कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अभी तक विभाग को किसी तरह का वित्तीय नुकसान साबित नहीं हुआ है। लेकिन मामले की जांच जारी है और अगर अपराध सामने आया तो केस दर्ज कर सख्त कार्रवाई होगी। यह मामला दिखाता है कि एक अहम कुर्सी पर बैठे अधिकारी किस तरह पूरे सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं।




