नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को दोष सिद्ध होने पर 30 दिन की जेल की सजा होने के बाद पद से हटाने संबंधी विधेयक को संसदीय संयुक्त समिति (JPC) के पास भेज दिया गया है। हालांकि, इस समिति के गठन को लेकर विपक्षी दलों के बीच मतभेद उभरने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस संयुक्त समिति में अपने सदस्यों को भेजने के पक्ष में नहीं है। TMC का यह रुख विपक्षी एकता में दरार की ओर इशारा करता है और विधेयक पर आम सहमति बनाना और अधिक जटिल हो सकता है।
TMC ने इंडिया ब्लॉक के नेताओं को दिया ये सुझाव
सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी ने इंडिया ब्लॉक की हालिया बैठक में सुझाव दिया कि पूरे विपक्ष को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को पद से हटाने से जुड़े विधेयक पर गठित की जा रही संयुक्त समिति (JPC) का बहिष्कार करना चाहिए। हालांकि, विपक्ष की अधिकांश अन्य पार्टियों का मानना है कि समिति में शामिल होकर ही वे सरकार पर प्रभाव डाल सकते हैं। उनके अनुसार, JPC एक ऐसा मंच है जहां विपक्ष न केवल अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकता है, बल्कि वैकल्पिक सुझाव भी पेश कर सकता है।
इस पर टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने तर्क दिया कि यदि विपक्ष समिति में शामिल होता है, तो सरकार वक्फ बिल की तरह कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेगी। इसके बाद पार्टी की ओर से संकेत मिले हैं कि TMC अपने 31 सांसदों में से किसी को भी समिति में शामिल नहीं करेगी। हालांकि, अब तक पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया गया है। वहीं, कांग्रेस को समिति में 4 से 5 सीटें मिलने की संभावना है। अन्य इंडिया ब्लॉक दल अब टीएमसी के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
TMC ने बिल को बताया विपक्षी सरकारों को गिराने का राजनीतिक हथकंडा
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इस विधेयक को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने इसे विपक्षी सरकारों को गिराने का एक राजनीतिक हथियार करार दिया है। पार्टी का कहना है कि यह विधेयक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने की कोशिश है और इसे संयुक्त समिति (JPC) को भेजना केवल समय की बर्बादी है। टीएमसी के अनुसार, सरकार के पास संसद में इस विधेयक को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं है, जो कि संविधान संशोधन विधेयकों के लिए अनिवार्य होता है। पार्टी का यह भी मानना है कि यदि किसी प्रकार यह विधेयक पारित हो भी जाता है, तो यह न्यायिक समीक्षा में टिक नहीं पाएगा।





