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Tuesday, March 10, 2026
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कट्टो गिलहरी… से कैबिनेट मंत्री तक, ऐसा रहा चिराग पासवान का सफर…

चिराग पासवान एक्टर बनने का सपना लेकर मुंबई गए। फिल्मी लाइन में सफलता नहीं मिलने पर वो राजनीति में उतर गए। अब कैबिनेट मंत्री बने। आखिर चिराग पासवान क्यों हैं बिहार का भविष्य? पढ़िए रिपोर्ट....

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। 2013 में हॉलीवुड की एक फिल्म आई थी नाम था ‘ओलंपस हेज फॉलेन’। फिल्म के अंत में राष्ट्रपति का किरदार निभा रहे एक्टर एरोन एकहार्ट का एक डायलॉग है। जिसका हिंदी में अनुवाद है “दुश्मन जरूर मजबूत था। उसने हमें नुकसान पहुंचाने की बहुत कोशिश की और किया भी। पर कोई भी मुसीबत आ जाए। हम गिरकर जरूर उठेंगे और नंबर वन बनेंगे। क्योंकि हम नंबर वन बनने के लिए ही पैदा हुए हैं।” एरोन की ये लाइनें चिराग पासवान पर एकदम फिट बैठती हैं। तमाम असफलताओं के बाद भी चिराग पासवान आगे बढ़ते गए। और आज उस मुकाम पर पहुंचे, जहां एक समय उनके लिए ये नामुमकिन था।

पिता की मौत और चाचा के धोखे ने चिराग को बनाया मजबूत

चिराग अपने पिता से राजनीति का ककहरा सीख ही रहे थे कि 2019 में पिता की अचानक मौत हो गई। अभी पिता की मौत के सदमें से उबरे भी नहीं थे कि चाचा ने पार्टी तोड़कर उनका वजदू खत्म करने की कोशिश की। यहां तक कि 2020 में नीतीश के दबाव में एनडीए से अलग होना होकर चुनाव भी लड़ना पड़ा, लेकिन चिराग हारे नहीं। अंत में बने तो सीधे केंद्रीय कैबिनेट मंत्री।

राजनीति में आने से पहले एक्टर थे चिराग

चिराग पासवान राजनीति में आने से पहले बॉलीवुड एक्टर थे। 2011 में उन्होंने कंगना रनौत के साथ फिल्म मिले ना मिले हम में काम किया था। फिल्मों में सफलता नहीं मिलने पर उन्होंने राजनीति ज्वाइन की और पिता की छत्रछाया में राजनीति के गुर सीखने लगे। 2014 में रामविलास पासवान ने बीजेपी के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा तो चिराग को जमुई से उम्मीदवार बनाया गया। मोदी लहर में चिराग ने जमुई से जीत दर्ज की। इसी तरफ 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने दोबारा जमुई से जीत दर्ज की।

2020 में चाचा पशुपति ने तोड़ दी थी लोजपा

2020 में रामविलास पासवान की मौत के बाद चिराग के चाचा पशुपति पारस ने लोजपा को तोड़ दिया और 6 सांसदों में से 5 को अपने साथ लेकर चले गए। जिसक बाद रामविलास राजनीतिक वनवास पर चले गए। 2021 में बीजेपी ने चाचा – भतीजे के बीच मतभेद में चाचा का साथ दिया। पर बीजेपी को अपनी गलती का एहसास हो गया कि उसने गलत व्यक्ति का साथ दिया है।

इसी साल मार्च में पशुपति पारस ने केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया क्योंकि लोकसभा चुनाव में एनडीए ने उनकी पार्टी को एक भी सीट नहीं दी थी जबकि लोजपा (रामविलास) को 5 सीटें आवंटित की थी।

लोकसभा 2024 के नतीजों ने किया स्थापित

4 जून को आए लोकसभा के नतीजों ने चिराग पासवान को एक परिपक्व नेता के रूप में स्थापित कर दिया है। लोकसभा चुनाव में चिराग पासवान की स्ट्राइक रेट 100 फीसदी रही है। चिराग पासवान की अहमियत को देखते हुए नरेंद्र मोदी ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाने का फैसला किया है। कल 9 जून को चिराग पासवान ने कैबिनेट मंत्री की शपथ लेकर अपने विरोधियों के मुंह को हमेशा के लिए बंद कर दिया है।

इसलिए चिराग को कहा जा रहा बिहार का भविष्य

बिहार में पासवान वोटों की संख्या 6 फीसदी है। जिसका लोकसभा के कई सीटों पर प्रभाव है। पासवान वोटों की संख्या और चिराग पासवान के बढ़ते राजनीतिक कद को देखेत हुए ये कहा जा सकता है कि आने वाले समय में चिराग पासवान को बिहार में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

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