नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिला पिछले करीब 40 सालों से नक्सलवाद की चपेट में था। यहां नक्सली हिंसा के चलते विकास के काम रुक जाते थे और आम लोग डरे हुए रहते थे। अब केंद्र सरकार ने इसे ‘LWE मुक्त’ यानी वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) से आजाद घोषित किया है।
सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई ने बदली तस्वीर
बीते कुछ वर्षों में बस्तर के अंदरूनी इलाकों में सुरक्षाबलों ने अपनी पकड़ मजबूत की। कई बड़े नक्सली कमांडरों को एनकाउंटर में मार गिराया गया और कई ने खुद ही आत्मसमर्पण कर दिया। सुरक्षाबलों ने विशेष अभियान चलाकर नक्सलियों को एक-एक कर खत्म किया।
एक के बाद एक एनकाउंटर से नक्सलियों की कमर टूटी
बस्तर को नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। लगातार एनकाउंटर और दबाव के चलते नक्सलियों की ताकत कमजोर हुई। कई नक्सली अपने हथियार छोड़कर अब मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। अब जब बस्तर ‘नक्सल मुक्त’ हो चुका है, तो यहां विकास के रास्ते खुल सकते हैं। सड़क, स्कूल, अस्पताल जैसे जरूरी काम अब तेज़ी से आगे बढ़ सकते हैं। स्थानीय लोगों के लिए यह बहुत बड़ी राहत की बात है।
छत्तीसगढ़ की सीमाएं कई नक्सल क्षेत्रों से जुड़ीं
छत्तीसगढ़ की सीमाएं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, ओडिशा और तेलंगाना से लगती हैं। इनमें से कई राज्यों में अभी भी नक्सल गतिविधियां जारी हैं। सुरक्षाबलों का अगला लक्ष्य इन बॉर्डर एरिया में बाकी बचे नक्सल गुटों को भी खत्म करना है। बस्तर का ‘नक्सल मुक्त’ घोषित होना केंद्र और राज्य सरकार, साथ ही सुरक्षा बलों की साझा सफलता है। यह उन जवानों की बहादुरी का नतीजा है जिन्होंने अपने प्राणों की परवाह किए बिना इस अभियान को अंजाम तक पहुंचाया। अब जब बस्तर नक्सलवाद से आजाद हो गया है, तो यहां शांति और विकास की नई शुरुआत हो सकती है। यह खबर ना सिर्फ छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ी राहत की बात है।




