नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों और पुलिस ने ज्वाइंट ऑपरेशन चलाया हुआ था जिसमें 34 नक्सलियों के मारे जाने की खबर सामने आ रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, मारे गए नक्सलियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए हैं। बताया जा रहा है कि सुरक्षाबलों ने इस ऑपरेशन में नक्सलियों के एक बड़े कैडर को निशाने पर लिया था। 21 मई की सुबह से ही यह कार्रवाई शुरू हुई थी, जब खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षाबलों को इलाके में बड़ी संख्या में नक्सलियों के जमावड़े की सूचना मिली थी। ऑपरेशन अभी भी जारी है और अधिकारियों के अनुसार आने वाले घंटों में और जानकारी सामने आ सकती है।
बस्तर में बड़े नक्सली कमांडर निशाने पर
जंगलों में सुरक्षाबलों को बड़ी खुफिया जानकारी मिलने के बाद आज सुबह से ही नक्सलियों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन शुरू किया गया। इस मुठभेड़ में अब तक 34 नक्सलियों को मार गिराया गया है। सूत्रों के मुताबिक, मारे गए नक्सलियों में कुछ बड़े कैडर के कमांडर भी शामिल हैं। बस्तर जोन में इन दिनों सुरक्षाबलों का फोकस नक्सलियों के शीर्ष नेतृत्व पर है। खबर है कि जिस क्षेत्र में कार्रवाई हुई, वहां प्रतिबंधित नक्सल संगठन के महासचिव बसवा राजू की मौजूदगी की सूचना भी थी, जिस पर 1.5 करोड़ रुपये का इनाम घोषित है, वह भी मारा गया है।
नक्सल संगठन की सबसे ताकतवर इकाई ‘पोलित ब्यूरो’
जंगलों में चल रहे सुरक्षा बलों के बड़े ऑपरेशन के केंद्र में नक्सल संगठन की सबसे शक्तिशाली इकाई पोलित ब्यूरो है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, इस क्षेत्र में पोलित ब्यूरो के कई शीर्ष सदस्य मौजूद हो सकते हैं, जिनमें बसवा राजू, मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति, मलोजुल्ला उर्फ भूपति, मिशिर बेसरा, और थिप्पारी तिरुपति जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी नक्सलियों पर 1 से 1.5 करोड़ रुपये तक के इनाम घोषित हैं और ये मुख्य रूप से तेलंगाना कैडर से आते हैं। यही समूह नक्सल संगठन के रणनीतिक और ऑपरेशनल फैसलों को अंजाम देता है और लगातार अपनी लोकेशन बदलकर सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देता रहा है।
इनमें से हिड़मा एकमात्र ऐसा शीर्ष नक्सली कमांडर है जो मूल रूप से छत्तीसगढ़ से है और संगठन की टॉप-2 टीम में शामिल है। हाल ही में कर्रेगुट्टा में हुए एक बड़े ऑपरेशन में हिड़मा को निशाना बनाया गया था, लेकिन वह मौके से भाग निकलने में कामयाब रहा। सुरक्षा बलों के मुताबिक, हाल के महीनों में हुए कई एनकाउंटर में बड़े कैडर के नक्सलियों को मारा गया है। अबूझमाड़ में जारी कार्रवाई को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।




