नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को केंद्र सरकार ने एक बड़ी राहत दे दी है। जिसकी वजह से अब RSS के कार्यक्रमों में सरकारी कर्मचारी बिना रोकटोक के शामिल हो सकेंगे। केंद्र सरकार ने एक आदेश के जरिये RSS से जुड़े 58 साल पुराने बैन को हटा दिया है। जिसके बाद से राजनीति गर्म हो गई है। आदेश जारी होते ही एक तरफ जहां कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। वहीं दूसरी तरफ ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के मुखिया व हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी बीजेपी पर जमकर हमला किया। उन्होंने केंद्र सरकार के इस फैसले को देश की एकता और अखंडता के खिलाफ बताया है।
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने क्या कहा?
असदुद्दीन ओवैसी ने इस संबंध में ट्वीट करते हुए कहा कि ‘कार्यालय ज्ञापन में कथित तौर पर दिखाया गया है कि भारत सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के RSS गतिविधियों में भाग लेने पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है। अगर यह सच है तो यह भारत की एकता और अखंडता के खिलाफ है। ओवैसी ने आगे लिखा है कि RSS पर इसलिए प्रतिबंध लगाया गया था क्योंकि इसने संविधान, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। हर RSS सदस्य राष्ट्र से ऊपर हिंदुत्व को रखने की शपथ लेता है। अगर कोई सरकारी कर्मचारी इसका सदस्य है तो वो राष्ट्र के प्रति वफादार नहीं हो सकता।’
जयराम नरेश ने सरकार पर साधा निशाना
वहीं इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता जयराम नरेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि फरवरी 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद सरदार पटेल ने RSS पर प्रतिबंध लगा दिया था। बाद में RSS के अच्छे आचरण पर इस प्रतिबंध को हटा भी दिया था। इसके बाद भी RSS मुख्यालय नागपुर में कभी तिरंगा नहीं फराया गया। 1966 में RSS में भाग लेने वाले सरकारी कर्मचारियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। जब अटल जी पीएम बने तब भी यहीं नियम रहा। अब मेरा मानना है कि नौकरशाही अब निक्कर में भी आ सकती है।
क्यों लगा था प्रतिबंध?
बता दें कि 1966 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने RSS के कार्यक्रमों में सरकारी कर्मचारियों के भाग लेने पर बैन लगा दिया था। जिसे अब डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल और ट्रेनिंग ने एक आदेश जारी कर इसे रद्द कर दिया है। पहले अगर सरकारी कर्मचारी RSS शाखा में भाग लेते तो उनको सजा दी जाती, यहीं प्रावधान था। इसलिए सरकारी कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद भी पेंशन इत्यादी लाभ के चलते RSS की शाखाओं में भाग लेने से कतराते थे। अब नए आदेश से सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।
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