नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। जैसे-जैसे हरियाणा में विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं। दोनों मुख्य पार्टियां कांग्रेस और बीजेपी अपनी राजनीतिक बिसात बिछाने में लग गई हैं। हरियाणा में मुख्य लड़ाई कांग्रेस और बीजेपी के बीच दिख रही है। बाकी पार्टियां जैसे इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) और जननायक जनता पार्टी (JJP)भी इस चुनाव में अपनी किस्मत आजमाएंगी। पिछले एक दशक से हरियाणा की सत्ता पर काबिज बीजेपी के लिए इस बार लड़ाई आसान नहीं दिख रही है। ऐसे में बीजेपी इस बार के विधानसभा चुनाव में मौजूदा मंत्रियों और विधायकों की जगह नए चेहरों को मौका दे सकती है।
25 फीसदी नए चेहरों को दे सकती है टिकट
बीजेपी ने हरियाणा के लिए सतीश पुनिया और धर्मेंद्र प्रधान को प्रभारी बनाया है। दोनों नेता प्रदेश में लगातार बैठकें कर रहे हैं और हालात का जायजा ले रहे हैं। बीजेपी इन मुद्दों पर मंथन कर रही है कि किस क्षेत्र से किसे टिकट दिया जाए और किन मुद्दों पर चुनाव में उतरा जाए।
लोकसभा में कांग्रेस ने दी थी कड़ी टक्कर
पिछली बार 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन के सहारे सत्ता में आई थी। लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी को कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिली थी। 10 लोकसभा सीटों वाले हरियाणा में कांग्रेस और बीजेपी को 5-5 सीटें मिली थी। इसलिए बीजेपी अब अपने कदम फूंक-फूंक कर रखना चाहती है। बीजेपी इस बार ऐसे उम्मीदवारों को टिकट देने का प्रयास कर रही है जो उसे चुनाव में जीत दिला सकें।
सामाजिक समीकरण को साधने की कर रही कोशिश
किसान आंदोलन के चलते बीजेपी को हरियाणा में काफी नुकसान हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए बीजेपी टिकट बंटवारे में सामाजिक समीकरणों का खासा ख्याल रखेगी। जाट मतदाताओं के समर्थन के बिना हरियाणा में बीजेपी को काफी मुश्किलें हो सकती हैं। जाट मतदाताओं को साधने के लिए बीजेपी राजस्थान के बड़े जाट नेता सतीश पुनिया को हरियाणा का प्रभारी बनाया है।
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