नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। बसपा चीफ मायावती ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले कि ‘राज्य अब आरक्षण के तहत अनूसूचित जाति और जनजाति के भीतर सब-कैटेगरी बना सकते हैं’ पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि इन वर्गों के बीच आरक्षण का बंटवारा करना कितना उचित होगा।
सामाजिक उत्पीड़न की तुलना में राजनीतिक उत्पीड़न कुछ भी नहीं: मायावती
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा है कि सामाजिक उत्पीड़न की तुलना में राजनीतिक उत्पीड़न कुछ भी नहीं। क्या देश के खासकर करोड़ों दलितों व आदिवासियों का जीवन द्वेष व भेदभाव-मुक्त आत्म-सम्मान व स्वाभिमान का हो पाया है। अगर नहीं तो फिर जाति के आधार पर तोड़े व पिछड़ गए इन वर्गों के बीच आरक्षण का बंटवारा कितना उचित है?
SC, ST व OBC बहुजनों के प्रति कांग्रेस व भाजपा दोनों का रवैया उदारवादी रहा है
मायावती ने कहा कि देश के SC, ST व OBC बहुजनों के प्रति कांग्रेस व भाजपा दोनों ही पार्टियों/सरकारों का रवैया उदारवादी रहा है सुधारवादी नहीं। वे इनके सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति के पक्षधर नहीं वरना इन लोगों के आरक्षण को संविधान की 9वीं अनुसूची में डालकर इसकी सुरक्षा जरूर की गई होती।
उल्लेखनीय है कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड की अध्यक्षता में संवैधानिक पीठ ने अपना फैसला सुनाया। चंद्रचूड़ सहित 6 जजों ने इस पर अपना समर्थन दिया जबकि एक जस्टिस बेला त्रिवेदी ने इस पर अपनी असहमति व्यक्त की। इस जजमेंट को पढ़ते समय चीफ जस्टिस ने कहा कि ऐतिहासिक और आनुभाविक सबूतों से पता लगता है कि एस सी की श्रेणी में आने वाले लोग होमोजीनस क्लास में नहीं आते हैं।
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