नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। बिहार सरकार ने सोमवार को नई ट्रांसफर पॉलिसी की घोषणा की है। इस पॉलिसी के तहत उन शिक्षकों को प्रथामिकता दी जाएगी जो गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं या दिव्यांग है। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने इस नीति की घोषणा करते हुए कहा कि केवल शिक्षकों के आवेदन केवल ऑनलाइन ही स्वीकार किए जाएंगे।
नई शिक्षा नीति से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा
सुनील कुमार ने कहा कि “नई ट्रांसफर नीति से प्रदेश के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के तबादलों और पोस्टिंग में एकरूपता आएगी। इससे न केवल शिक्षकों को राहत मिलेगी, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।” उन्होंने कहा, “इस नीति के तहत उन लोगों को प्रथमिकता दी जाएगी, जिनके साथ हेल्थ इशूज हैं। जो शिक्षक गंभीर रूप से बीमार हैं, दिव्यांग हैं, जिनके पति नहीं हैं, जो तलाकशुदा हैं, जो पति-पत्नी दोनों टीचर हैं उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही किसी भी स्कूल में महिला शिक्षकों की संख्या 70 से अधिक नहीं होनी चाहिए।”
हर 5 साल बाद होना चाहिए ट्रांसफर
टीचरों को इनकी पोस्टिंग के हर 5 साल बाद ट्रांसफर कर दिया जाना चाहिए। विभाग की ओर से उन्हें पोस्टिंग स्थानों से संबंधित 10 ऑप्शन देगा। साथ ही सुनिश्चित किया जाएगा कि उनके पास के जिले में या सबडिविजन में किया जाए।
BPSC के जरिए नियुक्त हुए टीचरों को मिलेगा लाभ
इस ट्रांसफर पॉलिसी ने उन 1.80 लाख शिक्षकों के लिए भी ट्रांसफर और पोस्टिंग का रास्ता खोल दिया है जिन्होंने राज्य में कंपीटिशन की परीक्षा पास की है। हालांकि यह नीति इन टीचरों पर लागू नहीं होती है जिन्हें स्थानीय नगर निकायों ने नियुक्त किया है या जिन्होंने कोई कंपीटिशन की परीक्षा पास नहीं की है। इस नीति का लाभ उन्हें मिलेगा जो BPSC के जरिए नियुक्त हुए हैं या जिन्होंने मैंडेटरी टेस्ट पास किया हुआ है।





