नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। हाल में ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दिल्ली में एक नए केदारनाथ मंदिर के भूमि पूजन समारोह में शामिल हुए थे। जिसके बाद उनकी खूब आलोचना हुई थी और एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। वहीं उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने इस विवाद के बाद एक ऐसा कानून लाने का फैसला लिया है, जिसके अंतगर्त कोई भी संगठन या ट्रस्ट उत्तराखंड के अंदर और देश के किसी भी जगह चारधाम मंदिरों के नाम का प्रयोग न कर पाए। वहीं कानून के विशेषज्ञ उत्तराखंड मंत्रिमंडल के इस फैसले को कानूनी रूप से मान्यता न मिलने की बात कर रहे हैं।
यह कानून कानूनी रूप से ही मान्य नहीं होगा: कानूनी विशेषज्ञ
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनके मंत्रिमंडल ने विवाद बढ़ जाने के बाद इस तरह के कानून लाने का फैसला किया। अब उत्तराखंड मंत्रिमंडल के इस फैसले के बाद कानूनी विशेषज्ञ इसको लेकर दावा कर रहे हैं कि यह कानून कानूनी रूप से ही मान्य नहीं होगा। यह विवाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिल्ली में एक नए केदार नाथ मंदिर के भूमि पूजन समारोह में शामिल होने के बाद शुरू हुआ था।
उत्तराखंड मंत्रिमंडल का यह फैसला जब कानून में तब्दील हो जाएगा तो इस कानून के तहत देश में कोई भी संगठन और ट्रस्ट देश के किसी भी स्थान में चारधाम मंदिरों के नाम का प्रयोग नहीं कर पाएंगे। यह बात अलग है कि कानून के विशेषज्ञों की बात में कितनी सच्चाई है, यह उत्तराखंड में इस कानून के लागू हो जाने के बाद पता चलेगा।
कांग्रेस और केदारनाथ धाम के पुजारियों ने धामी की खूब आलोचना की
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने यह फैसला 18 जुलाई 2024 को हुई बैठक में लिया है। उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने चार धामों केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के नाम का प्रयोग देश के किसी भी हिस्से में न हो इसके लिए यह फैसला लिया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिल्ली में एक नए केदारनाथ मंदिर के भूमि पूजन समारोह में शामिल होने के बाद विवाद बढ़ गया था। कांग्रेस और केदारनाथ धाम के पुजारियों ने पुष्कर सिंह धामी की खूब आलोचना की।
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