नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। शिवसेना के संस्थापक के बाला साहेब ठाकरे की आज जयंती है। 23 जनवरी 1926 को जन्मे बाल ठाकरे के बचपन का नाम बाल केशव ठाकरे था। बाल ठाकरे के करियर की शुरुआत के एक कार्टूनिस्ट के तौर पर हुई थी, लेकिन 1960 में नौकरी छोड़ वह राजनीति में आ गए। 1966 में उन्होंने शिवसेना की नींव रखी थी। बाल ठाकरे को हिंदू हृदय सम्राट भी कहा जाता था, उन्हें सुनने के लिए लाखों की भीड़ एकजुट होती थी।
जब बाला साहेब ठाकरे ने चलाई रिमोट कंट्रोल सरकार
साल 1995 में शिवसेना पहली बार महाराष्ट्र की सत्ता में आई थी। शिवसेना और बीजेपी की गठबंधन वाली सरकार सत्ता में आई थी। 1999 तक चली इस सरकार में खुद बाला साहेब ठाकरे शामिल नहीं थे। लेकिन सरकार के हर फैसले पर उनका प्रभाव दिखता था। इस वजह से विरोधी इस सरकार को रिमोट कंट्रोल सरकार भी कहते थे। बाला साहेब ठाकरे के बारे में एक खास बात ये थी कि वो खुद सत्ता में रहने की बजाए किंगमेकर बनना पसंद करते थे। बाला साहेब ठाकरे के बारे में कहा जाता है कि जब वो किसी का विरोध करते थे तो दुश्मनी की हद तक विरोध करते थे और अगर किसी को अपना मान लेते थे तो उनसे बड़ा दोस्त कोई नहीं था।
लगा था चुनाव लड़ने और वोट डालने पर वोट
बाल ठाकरे की राजनीति अल्पसंख्यक विरोधी और गैर-मराठीभाषी विरोधी मानी जाती थी। बाल ठाकरे महाराष्ट्र को केवल मराठियों का बताते थे और उत्तर भारतीयों के खिलाफ अभियान चलाते थे। नफरत की राजनीति के आरोपों के चलते साल 1999 में चुनाव आयोग ने बाल ठाकरे के चुनाव लड़ने और वोट डालने पर बैन लगा दिया था। छह साल का बैन। साल 2005 में बैन हटने के बाद ही वो वोट डाल पाए।





