नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि देश में कुछ राजनीतिक दल घुसपैठियों को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। अमित शाह ने यह बात दैनिक जागरण के पूर्व प्रधान संपादक नरेंद्र मोहन की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम ‘घुसपैठ, जनसांख्यिकीय परिवर्तन और लोकतंत्र’ को संबोधित करते हुए कही।
”राजनीतिक दल घुसपैठियों को बना रहे वोट बैंक”
अमित शाह ने कहा कि कुछ राज्य सरकारें जानबूझकर घुसपैठियों को संरक्षण देती हैं क्योंकि उन्हें उनमें वोट बैंक नजर आता है। उन्होंने सवाल उठाया अगर कोई व्यक्ति अवैध रूप से देश में प्रवेश करता है और जिला प्रशासन उसकी पहचान नहीं कर पाता, तो घुसपैठ कैसे रोकी जा सकती है? उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र अकेले घुसपैठ को नहीं रोक सकता, इसके लिए राज्य सरकारों का सहयोग जरूरी है।
”घुसपैठ रोकना राष्ट्रीय कर्तव्य”
शाह ने कहा कि घुसपैठ रोकना राजनीतिक नहीं, राष्ट्रीय कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग शरणार्थी और घुसपैठिए में फर्क नहीं कर पाते, और ऐसा करना अपनी अंतरात्मा से धोखा देने जैसा है। गृह मंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा,“हमारे गुजरात और राजस्थान की भी सीमाएं लगती हैं, लेकिन वहां घुसपैठ नहीं होती। अमित शाह ने असम और पश्चिम बंगाल के आंकड़े गिनाए। उन्होंने कहा, असम में 2011 की जनगणना के मुताबिक मुस्लिम जनसंख्या की वृद्धि दर 29.6% थी। पश्चिम बंगाल के कई जिलों में यह 40% से 70% तक पहुंच गई है। यह आंकड़े साफ बताते हैं कि अतीत में घुसपैठ हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में जनजातीय जनसंख्या घट रही है, और इसका कारण बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ है।
”लोकतंत्र के लिए खतरा”
अमित शाह ने कहा कि जब देश की जनसंख्या का संतुलन घुसपैठ की वजह से बदलता है, तो यह लोकतंत्र और सांस्कृतिक पहचान दोनों के लिए खतरा बन जाता है। घुसपैठ को नजरअंदाज करना देश की सुरक्षा के साथ समझौता करना है। शाह ने कहा। गृह मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। शाह का यह बयान विपक्ष पर सीधा हमला माना जा रहा है, खासकर उन दलों पर जो घुसपैठ के मुद्दे पर नरम रुख अपनाते रहे हैं।





