नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। लोकसभा में परिसीमन विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज सांसद ने दावा किया कि अगर उत्तर प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या 600 तक पहुंचती है, तो भारतीय जनता पार्टी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ सकता है।
सीटें बढ़ीं तो BJP हार जाएगी
उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर अखिलेश यादव ने कहा कि विधानसभा सीटों की संख्या 500 से ज्यादा होकर 600 तक पहुंच सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि यह सब एक योजना के तहत किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “अगर सीटें बढ़ती हैं तो कहीं ऐसा तो नहीं कि इसके पीछे कोई षड्यंत्र है। अगर ऐसा हुआ तो जैसे अयोध्या हारे, वैसे ही एक बार फिर यूपी हार जाएंगे।
परिसीमन पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने परिसीमन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे बीजेपी का सबसे बड़ा षड्यंत्र बताया। उन्होंने कहा कि बिना जनगणना कराए परिसीमन करना गलत होगा। उनका कहना है कि सरकार को पहले जनगणना करानी चाहिए, उसके बाद ही सीटों का नया बंटवारा होना चाहिए। अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा महिलाओं को आगे बढ़ाने के पक्ष में रही है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण सही तरीके से लागू होना चाहिए इसमें सभी वर्गों को बराबर अवसर मिलना चाहिए खास तौर पर मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण दिया जाना चाहिए।
BJP पर साधा निशाना
अखिलेश यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह सत्ता में बने रहने के लिए इस बिल को ला रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी महिलाओं के नाम पर राजनीति कर रही है, जबकि अपने संगठन में ही महिलाओं को पर्याप्त जगह नहीं देती। उन्होंने सवाल उठाया कि देश में बीजेपी की कई सरकारें हैं, लेकिन कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं? इस दौरान अखिलेश यादव ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पर भी तंज कसते हुए कहा कि सास-बहू वाली तो हार गईं। परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर संसद में बहस तेज हो गई है। जहां एक तरफ सरकार इसे सुधार और प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति करार दे रहा है। लोकसभा में अखिलेश यादव का यह बयान साफ दिखाता है कि आने वाले समय में परिसीमन और महिला आरक्षण बड़ा चुनावी मुद्दा बनने वाला है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। अब देखना होगा कि सरकार इन सवालों का क्या जवाब देती है और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।




