नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का निधन हो गया है। आज सुबह हुई प्लेन क्रैश में उनकी जान चली गई। सूत्रों के अनुसार, अजीत पवार जिला पंचायत परिषद चुनाव प्रचार के लिए मुंबई से प्राइवेट एयर क्राफ्ट से निकले थे बारामती के लिए। तभी लैंड करते समय क्रेश हुआ और क्रेश के बाद फ़्यूल टैंक में ब्लास्ट हुआ। इस हादसे में अजित पवार समेत विमान में सवार सभी 6 लोगों की मौत हो गई।
कौन थे अजित पवार?
अजित पवार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता थे और इस समय महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम पद पर कार्यरत थे।
वह एनसीपी (शरद पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार के भतीजे थे। पिछले साल उन्होंने अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर बीजेपी- शिवसेना गठबंधन सरकार का साथ दिया था, जिसके बाद उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया।
चुनाव प्रचार के लिए बारामती में थे कार्यक्रम
बुधवार को कई सभाओं को संबोधित करने वाले थे अजित पवार बताया जा रहा है कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार 28 जनवरी 2026 (बुधवार) को बारामती तालुका में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के प्रचार के सिलसिले में कई जनसभाओं में शामिल होने वाले थे। इसी दौरान उनके यात्रा कार्यक्रम से जुड़ी यह खबर सामने आई, जिसके बाद समर्थकों और पार्टी नेताओं में चिंता बढ़ गई।
राजनीति नहीं, तो बॉलीवुड भी हो सकता था रास्ता
पिता का जुड़ाव था फिल्मी दुनिया से कम लोग जानते हैं कि अगर अजित पवार राजनीति में नहीं आते, तो उनका नाम फिल्मी दुनिया से भी जुड़ सकता था। उनके पिता अनंतराव पवार, मशहूर फिल्म निर्देशक वी. शांताराम के साथ ‘राजकमल स्टूडियो’ में काम करते थे। लेकिन अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की तरह राजनीति को ही जीवन का रास्ता चुना। दादा के नाम से मशहूर, बेबाक नेता अजित पवार को उनके समर्थक ‘दादा’ कहकर बुलाते हैं। उन्हें महत्वाकांक्षी और साफ़ बोलने वाला नेता माना जाता है। माना जाता है कि उनकी नजर हमेशा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद पर रही है। 2009 के विधानसभा चुनाव के बाद डिप्टी सीएम न बनाए जाने से वह नाराज़ हुए थे, लेकिन दिसंबर 2010 में उन्होंने यह पद हासिल कर लिया। गन्ना सहकारी समितियों से विधानसभा तक का सफर अजित पवार ने राजनीति में कदम गन्ना सहकारी समितियों के ज़रिये रखा। 1991 में वह बारामती से सांसद चुने गए, लेकिन छह महीने बाद ही उन्होंने पद छोड़ दिया, क्योंकि उस समय शरद पवार केंद्र में रक्षा मंत्री बने थे। इसके बाद अजित पवार ने विधानसभा चुनाव जीता और राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ बना ली।




