नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के शिक्षकों के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया है। कैबिनेट बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने जानकारी दी कि कुल 30 प्रस्तावों पर मुहर लगी है, जिनमें शिक्षकों को कैशलेस मेडिकल सुविधा देने का अहम निर्णय शामिल है। इस फैसले के तहत बेसिक शिक्षा विभाग के 11 लाख 95 हजार 391 शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा। इस योजना पर करीब 358.61 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसके साथ ही माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को भी इस योजना के दायरे में लाया गया है, जिससे लगभग 3 लाख शिक्षक लाभान्वित होंगे। सरकार के इस कदम को शिक्षकों की सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है।
पहली बार माध्यमिक शिक्षकों को कैशलेस इलाज की सौगात
मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन आने वाले शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के साथ-साथ स्ववित्त पोषित माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक भी इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। मंत्री ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह पहली बार है जब इस वर्ग के शिक्षकों को इस तरह की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
इन शिक्षकों को मिलेगा लाभ
माध्यमिक शिक्षा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने स्पष्ट किया कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ माध्यमिक शिक्षा विभाग से जुड़े विभिन्न वर्गों के शिक्षकों को दिया जाएगा। इस योजना के तहत अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक, व्यावसायिक शिक्षा से जुड़े विषय विशेषज्ञ और मानदेय पर नियुक्त शिक्षक शामिल होंगे। इसके अलावा संस्कृत शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त अनुदानित विद्यालयों के शिक्षक भी इस सुविधा के दायरे में आएंगे। साथ ही, माध्यमिक शिक्षा परिषद और संस्कृत शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त स्ववित्त पोषित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को भी कैशलेस मेडिकल सुविधा का लाभ मिलेगा।
शिक्षकों के साथ उनके परिवार को भी मिलेगा फायदा
माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने आगे बताया कि इस योजना के तहत केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में मानदेय पर कार्यरत व्यावसायिक शिक्षा के विषय विशेषज्ञों के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्य भी इस योजना के दायरे में आएंगे। स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह सुविधा सरकारी अस्पतालों के अलावा चयनित निजी अस्पतालों में भी उपलब्ध कराने का प्रावधान किया है, जहां आईपीडी (IPD) इलाज पूरी तरह कैशलेस होगा।




