-क्रांतिकारी डा.भगवानदास माहौर की पुण्यतिथि पर साहित्यकारों ने किया नमन हमीरपुर, 12 मार्च (हि.स.)। सुमेरपुर कस्बे में शुक्रवार को वर्णिता संस्था के तत्वाधान में जिनका देश ऋणी है उसके तहत आजादी के संघर्ष के महान सूरमा डा.भगवानदास माहौर की पुण्यतिथि पर साहित्यकारों ने उन्हें याद करते हुये नमन किया। कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष डा.भवानीदीन ने कहा कि कहा कि मिहौर जी वास्तव में मां भारती के सच्चे सूरमा थे। इनका मध्य प्रदेश के दतिया जिले के बडौनी गांव में 27 फरवरी 1909 को जन्म हुआ था। जहां के गामा पहलवान भी थे उन्होंने प्राथमिक शिक्षा गांव से प्राप्त की। उसके बाद झांसी आ गए और झांसी में मास्टर रूद्र नारायण जैसे महान क्रांतिकारी के संपर्क में आने पर माहौर की चंद्रशेखर आजाद से मुलाकात हुई और मात्र 14 वर्ष की अवस्था में हुए आजादी के संग्राम में कूद पड़े थे। तब से वह आजादी प्राप्ति तक पीछे मुड़कर नहीं देखा। चंदशेखर आजाद, भगत सिंह, शचीन्द्र नाथ बक्शी जैसे महान क्रांतिकारियों के दाहिने हाथ थे। भुसावल बम कांड के नायक थे। जहां पर आजाद ने जलगांव में इनको राजगुरु को कुछ हथियार देने के लिए सदाशिव मलका पुरकर के साथ भेजा था। यह दोनों पकड़े गए और माहौर को आजन्म कारावास की सजा हुई। इसके अलावा 1928 के सान्डर्स वध में माहौर का सहयोग था। माहौर 1938 में छूटे। उसके बाद अपनी शिक्षा को बढ़ाया और उन्होंने शोध उपाधि प्राप्त की और बीकेडी कॉलेज में प्रोफ़ेसर हो गए। उसके बाद 12 मार्च 1979 को आजाद की प्रतिमा का अनावरण करते समय लखनऊ में इनका निधन हो गया, उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। कार्यक्रम में राजकुमार सोनी सर्राफ,अशोक अवस्थी, दिलीप अवस्थी, कल्लू चौरसिया, वृंदावन लाल गुप्ता, प्रांशु सोनी आदि उपस्थित रहे। हिन्दुस्थान समाचार/पंकज/




