नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। महाकुंभ में जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने खून से एक चिट्ठी लिखी। इस पत्र में उन्होंने पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सैन्य कार्रवाई की मांग की। अब वे इस चिट्ठी पर अन्य संतों के हस्ताक्षर जुटा रहे हैं, ताकि इस मुद्दे को बड़े स्तर पर पीएम मोदी तक पहुंचाया जा सके।
विवादों से पुराना नाता
यति नरसिंहानंद पहले भी अपने विवादित बयानों के कारण चर्चा में रहे हैं। महाकुंभ में उन्होंने हिंदू राष्ट्र की मांग करते हुए मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बयान दिए थे। उन्होंने दावा किया कि भारत में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है और 2035 तक कोई मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकता है। उन्होंने हिंदुओं से ज्यादा बच्चे पैदा करने का आह्वान भी किया। दो महीने पहले उन्होंने पैगंबर हजरत मुहम्मद के खिलाफ टिप्पणी की थी, जिससे काफी विवाद हुआ था। इसके अलावा, महिलाओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणियों के चलते उन पर FIR भी दर्ज की जा चुकी है।
रूस में पढ़ाई, ब्रिटेन में नौकरी
यति नरसिंहानंद का असली नाम दीपक त्यागी है। वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए रूस गए थे और ब्रिटेन सहित कई अन्य देशों में काम कर चुके हैं। बाद में भारत लौटकर वे समाजवादी पार्टी से जुड़े और फिर संत बन गए। यति नरसिंहानंद उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित डासना शिवशक्ति धाम के महंत हैं। पिछले 20 सालों से वे इस मंदिर से जुड़े हुए हैं। उनका असली नाम दीपेंद्र नारायण सिंह था, जिसे बदलकर उन्होंने यति नरसिंहानंद रख लिया।
परिवार से अलग रहते हैं
यति नरसिंहानंद की शादी हो चुकी है और उनकी एक बेटी भी है, लेकिन वे अपनी पत्नी और बेटी से अलग रहते हैं। वह ‘हिंदू स्वाभिमान’ संस्था और ‘धर्म सेना’ नामक संगठन भी चलाते हैं, जिसमें हिंदू युवाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाता है। 2021 में उन्हें जूना अखाड़ा द्वारा महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई थी। यति नरसिंहानंद का यह कदम एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ले आया है। देखना होगा कि उनकी चिट्ठी पर सरकार क्या प्रतिक्रिया देती है।





