— प्याज के पौधे की पत्तियों पर पीली धारियां, सफेद पर्त व सिकुड़ना रोग लगने के बचाएं औरैया, 21 मई (हि.स.)। प्याज की फसल तैयार होते समय किसान ध्यान रखे पौधे में रोग लगने पर शीघ्र दवा का छिड़काव करें रोग की पहचान कर दवा का प्रयोग करे जिससे उत्पादन पर असर न पड़े और फसल की अच्छी पैदावार मिल सके। जनपद के गांव परवाहा स्थित सरपंच समाज कृषी विज्ञान केंद्र के पौध संरक्षण विशेषज्ञ डॉ अंकुर झा ने जानकारी देते हुए बताया कि प्याज की फसल में कीटों की रोकथाम के लिए किसान निम्नलिखित उपाय करें जिससे फसल का उत्पादन अच्छा मिल सके। प्याज की कुछ प्रमुख कीटों एवं बीमारियों का नियंत्रण मोजैक/सफेद मक्खी एवं चेपा-इस कीट के शिशुओं व वयस्कों के रस चूसने से पत्ते पीले पड़ जाते हैं। यह विषाणु द्वारा होता है इस बीमारी से ग्रसित पौधे की पत्तियों पर पीले रंग की धारियां या धब्बे बन जाते हैं एवं पत्तियां छोटी रह जाती हैं और सिकुड़ने लगती हैं तथा इस रोग का फैलाव रस चूसने वाले कीटों द्वारा होता है। इस रोग की रोकथाम के लिए रोगग्रस्त पौधों की पहचान कर शीघ्रता से उखाडकर गड्डे में दबा देना चाहिए। वायरस के संवाहक सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोरप्रिड नामक दवा को 17.8 एस.एल. एक मिली./ली. का शायंकाल के समय छिड़काव करें एवं पीले व नीले रंग के स्टिकी ट्रैप (चिपकने वाला यंत्र) 10-12 ट्रैप/एकड़ की दर से प्रयोग करें। चूर्णिल आसिता का आक्रमण होने पर पत्तियों पर सफेद पर्ते चढ़ जाती हैं। इसकी रोकथाम के लिये कैराथिन नामक दवा को एक ग्राम/ली. पानी में या बेविस्टीन दो ग्राम/ली. पानी में घोलकर 10-12 दिनों के अन्तराल पर शायंकाल के समय छिड़काव करें। झुलसा रोग की रोकथाम के लिए तत्काल खेतो का पानी निकाल दें और सांयकाल में कैप्टन प्लस हेक्साकोनाजोल (ताकत) 30 ग्राम एवं एस्ट्रोप्टोसाइक्लीन 2.5 ग्राम नामक दवा को प्रति 15 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें एन्थ्रेक्नोज- इस बीमारी में हल्के भूरे धब्बे पत्तियों में आते हैं जो कि बाद में हरे भूरे रंग में परिवर्तित होकर पूरे पौधों में फैल जाते हैं। इस बीमारी की रोकथाम के लिए बेबिस्टीन नामक दवा को 2.0 ग्राम/ली. पानी में घोल बनाकर शायंकाल के समय छिड़काव करें। हिन्दुस्थान समाचार/ सुनील




