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Wednesday, March 18, 2026
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सिक्किमः हिमस्खलन से मरने वालों की संख्या हुई 7 हुई, फिर शुरू होगा राहत बचाव कार्य

सिक्किम की राजधानी गंगटोक में हिमस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। बुधवार से राहत बचाव कार्य फिर शुरू किया जा रहा है। पीड़ितों का हाल जानने सीएम और राज्यपाल सीधे अस्पलात पहुंचे।

गंगटोक, एजेंसी। सिक्किम की राजधानी गंगटोक के पास मंगलवार सुबह हुए हिमस्खलन की चपेट में आने से कुल 7 लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में तीन नेपाल, दो उत्तर प्रदेश और दो पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं।

जेएन रोड के 14 और 15 मील पर पर्यटक चपेट में आए है
राजधानी गंगटोक को भारत-चीन सीमा क्षेत्रों से जोड़ने वाली मुख्य सड़क जवाहरलाल नेहरू रोड (जेएन रोड) पर बीते मंगलवार की सुबह हिमस्खलन हुआ। जेएन रोड के 14 और 15 मील के बीच बर्फ का आनंद ले रहे पर्यटक अचानक हिमस्खलन की चपेट में आ गए। इसमें 7 लोगों की मौत हो गई।

प्रतिकूल मौसम के कारण ऑपरेशन स्थगित कर दिया गया
गंगटोक के जिलापाल तुषार निखारे और पुलिस अधीक्षक तेनजिंग लोडेन लेप्चा ने कल देर रात आयोजित संवाददाता सम्मेलन में इसकी पुष्टि की। जिलापाल निखरे ने बताया कि कल रात छह बजे तक सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन चला। हालांकि प्रतिकूल मौसम के कारण ऑपरेशन स्थगित कर दिया गया।

घायलों को गंगटोक के एसटीएनएम अस्पताल में भर्ती कराया गया
राहत बचाव कार्य बुधवार से शुरू हो रहा है, जिसमें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, बीआरओ, पुलिस, आपदा प्रबंधन दस्ता आदि शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि सर्च ऑपरेशन के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि कोई अन्य पर्यटक फंसा है या नहीं। उन्होंने बताया कि हिमस्खलन से अब तक कुल 7 लोगों की मौत हो चुकी है और 13 लोग घायल हो गए हैं। घायलों को गंगटोक के एसटीएनएम अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनमें से 7 को छुट्टी दे दी गई है, जबकि 6 का इलाज चल रहा है।

शव को भेजने के लिए समाज कल्याण विभाग कर रहा समन्वय

उन्होंने बताया कि बंगाल के दोनों मृतकों के शव एंबुलेंस के जरिए उनके घर भेजे जाएंगे। इसी तरह उत्तर प्रदेश के दो मृतकों के शवों को फ्लाइट से भेजा जाएगा। जबकि नेपाल के तीन मृतकों के शवों को नेपाल भेजने के लिए समाज कल्याण विभाग समन्वय कर रहा है। सिक्किम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य और मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग कल रात एसटीएनएम अस्पताल पहुंचे और पीड़ितों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। राज्यपाल और मुख्यमंत्री दिल्ली दौरे पर थे। वे दिल्ली से सीधे अस्पताल पहुंचे। उन्होंने पीड़ितों को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।

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