जयपुर, 23 अप्रैल (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के चलते गर्भवती हुई 17 वर्षीय पीडिता को अपना 24 सप्ताह का गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है। अदालत ने सीएमएचओ, कोटा को निर्देश दिए हैं कि वह तत्काल मेडिकल बोर्ड गठित कर पीडिता का परीक्षण करें और संभव होने पर पीडिता के स्वास्थ्य और एडवांस स्टेज को देखते हुए तुरंत गर्भपात किया जाए। न्यायाधीश पंकज भंडारी ने यह आदेश पीडिता की ओर से अपने पिता के जरिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि गर्भपात के बाद भ्रूण को डीएनए जांच के लिए सुरक्षित रखा जाए। मामले के अनुसार पीडिता के साथ दुष्कर्म होने के चलते वह गर्भवती हो गई थी। इस पर पीडिता की ओर से कोटा के मंडाना थाने में दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया गया। वहीं गर्भपात के लिए जिला विधिक सेवा समिति के समक्ष प्रार्थना पत्र दिया गया। इस पर समिति की ओर से प्रकरण को राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में भेजकर पीडिता की विधिक सहायता चाही गई। इस पर प्राधिकरण ने अधिवक्ता डीडी खंडेलवाल को नियुक्त कर अदालत में याचिका पेश की। सुनवाई के दौरान पीडिता की ओर से उसके अधिवक्ता ने कहा कि पीडिता की शारीरिक अवस्था और चिकित्सीय पेचीदगियों को ध्यान में रखते हुए तत्काल गर्भपात की अनुमति दी जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने पीडिता को तत्काल गर्भपात कराने की अनुमति दी है। हिन्दुस्थान समाचार/ पारीक/ ईश्वर




