-सांपला के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करने वाले किसानों के पर केस दर्ज होने की निंदा लुधियाना, 05 जून (हि.स.)। सयुंक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर संर्पूण क्रांति दिवस मनाते हुए पंजाब के 32 किसान संगठनों द्वारा धरने के 248वें दिन 250 स्थानों पर केन्द्र सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने तीनों कृषि कानूनों, बिजली संशोधन बिल और पराली आर्डीनेंस को रद्द करने की मांग करते हुए कृषि कानून की कापियां जला दीं। सयुंक्त किसान मोर्चो के बलवीर सिंह राजेवाल समेत अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि करीब 500 किसान शहीद हो चुके हैं, परंतु अभी भी केन्द्र सरकार ने जिद्द पकड़ी हुई है जिससे साबित होता है कि केन्द्र सरकार को किसानों से अधिक कार्पोरेट घरानों के फायदे ज्यादा प्रिय हैं। अलग-अलग स्थानों पर दिए जा रहे धरनों के दौरान संबोधित करते हुए मोर्चा के ओहदेदारों ने कहा कि 6 जून 2017 को मध्यप्रदेश के मंदसौर में सरकार के आगे अपनी बेसिक मांगें रखने के लिए विरोध प्रदर्शन करने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया व गोलियां चलाई। इस गोली कांड में 6 किसान शहीद और सैकड़ों घायल हुए थे। उन्होंने सभी शहीद किसानों को याद करते हुए श्रद्धांजिल देते हुए प्रण किया कि वह किसी भी पुलिस कार्रवाई से नहीं डरेगें और अपना सर्घंष जारी रखेंगे। गत दिनों भाजपा नेता विजय सांपला के विरोध में एकत्र हुए किसानों के खिलाफ मामला दर्ज करवाने की निंदा की। उन्होंने कहा कि यह कृषि कानून जितना किसानों के लिए घातक है, उतना ही दूसरे वर्गों के लिए भी जनविरोधी है। कृषि सुधार के नाम पर पास कानून अनाज भंडार करने की छूट देते हैं जोकि छोटे किसानो व मजदूरों के बस की बात नहीं है। इसके साथ ही सीधे तौर पर अनाज भंडारों पर मुनाफाखोर कार्पोरेट घरानों का कब्जा हो जाएगा। कार्पोरेट कम रेटों पर खरीदे गए अनाज को दोगुणे चौगुणे रेटों पर बेचेगा। मजदूरों के लिए इन हालातों में खाने के योग्य अनाज प्राप्त करना भी मुश्किल हो जाएगा। पिछले कुछ सालों में लाखों किसानों की आत्महत्याएं आजाद भारत के माथे पर कलंक की तरह है। कृषि संबंधी गलत सरकारी नीतियों के कारण पिछले कुछ अर्से से लाखों की गिनती में छोटे किसान अपनी जमीन गवां बैठे है और बड़ी तेजी से यह क्रम जारी है। हिन्दुस्थान समाचार / कुमार




