नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेता रोहित पवार ने हाल ही में बारामती विमान हादसे को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं और इसे संभावित सोची-समझी साजिश करार दिया है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हादसे के समय विमान का फ्यूल टैंक पूरा भरा हुआ था, और विंग्स में भी टैंक भरे हुए थे, जो इस घटना को संदिग्ध बनाता है। उनका कहना है कि केवल तकनीकी खराबी या मानवीय त्रुटि इसे नहीं समझा सकती, बल्कि इस पूरे मामले में पायलट का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।
ब्लैक बॉक्स की थ्योरी पर भी संदेह जताया
उन्होंने ब्लैक बॉक्स की थ्योरी पर भी संदेह जताया और कहा कि जानकारों के अनुसार ब्लैक बॉक्स तभी खराब हो सकता है जब वह 1100 डिग्री सेल्सियस पर एक घंटे तक जले, जबकि पानी में एक महीने तक रहने पर यह सुरक्षित रहता है।
तकनीकी खामियों को छिपाना मुश्किल है
रोहित पवार ने विमान की तकनीकी स्थिति और इंश्योरेंस वैल्यू पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि विमान की इंश्योरेंस वैल्यू 55 करोड़ रुपये थी, जबकि इसकी कुल देयता 210 करोड़ रुपये थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल कागजी कार्रवाई पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए और इस मामले में डिजिटल सबूतों की गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विमान की बॉडी एल्युमीनियम और बाहरी हिस्से टाइटेनियम से बने हैं, इसलिए तकनीकी खामियों को छिपाना मुश्किल है।
”राजनीतिक और आर्थिक हित जुड़े हो सकते हैं”
रोहित पवार ने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों की धीमी गति और अधूरी कार्रवाई संदेह बढ़ा रही है। उन्होंने बताया कि अब कई नेता भी पत्र लिखकर मामले में गहन और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह घटना केवल एक विमान हादसा नहीं है, बल्कि इसके पीछे संभावित राजनीतिक और आर्थिक हित जुड़े हो सकते हैं।
”मामले की तेजी से और पारदर्शी जांच की जाए”
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि मामले की तेजी से और पारदर्शी जांच की जाए, ताकि सच सामने आए और दोषियों को सजा मिले। रोहित पवार के बयान ने न केवल हादसे की जांच पर सवाल उठाए हैं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। यह मामला अब विमान सुरक्षा, तकनीकी खामियों और संभावित साजिश के इर्द-गिर्द राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गया है
”मानवीय त्रुटि मानकर मामले को बंद करना सही नहीं”
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि केवल तकनीकी या मानवीय त्रुटि मानकर मामले को बंद करना सही नहीं होगा। डिजिटल और फोरेंसिक सबूत के आधार पर गहन जांच ही घटना की वास्तविकता सामने ला सकती है।





