नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र के पुणे की एक विशेष अदालत ने नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड मामले में 11 साल बाद अपना फैसला सुनाया है। नरेंद्र दाभोलकर अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले कार्यकर्ता थे। वह महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक थे। महाराष्ट्र की पुणे की विशेष अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ए.ए. जाधव ने दो आरोपियों शरद कालस्कर और सचिन अंदुरे को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों पर 5 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। महाराष्ट्र की पुणे की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में 3 आरोपियों को बरी कर दिया है।
पुणे की विशेष अदालत ने नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के 11 साल बाद यह फैसला सुनाया
नरेंद्र दाभोलकर की हत्या 20 अगस्त 2013 को ओंकारेश्वर ब्रिज पर की गई थी, जहां दाभोलकर अपनी सुबह की सैर कर रहे थे। इस केस में पांच लोगो को आरोपी बनाया गया था। हाईकोर्ट की निगरानी में सीबीआई ने अगस्त 2015 से इस मामले की जांच शुरू की थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह केस पुणे पुलिस से सीबीआई को सौंप दिया था। जिसमे पुणे की विशेष अदालत ने नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के 11 साल बाद यह फैसला सुनाया है।
कोई भी अन्य व्यक्ति डर के मारे उनके ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ से न जुड़ पाए
सीबीआई द्वारा केस को अपने हाथ में लेने के बाद में, पुणे की विशेष अदालत ने 15 सितंबर, 2021 को हत्याकांड से जुड़े पांचो आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए थे। कोर्ट ने जांच में पाया था कि नरेंद्र दाभोलकर की हत्या की साजिश रची गयी थी। जिससे नरेंद्र दाभोलकर की अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई रुक जाए और कोई भी अन्य व्यक्ति डर के मारे उनके ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ से न जुड़ पाए।
जिसके कारण उन्होंने इस हत्याकांड को अंजाम दिया
अभियोजन पक्ष ने मुकदमे के दौरान 20 गवाहों से सवाल जवाब किए और बचाव पक्ष ने 2 गवाहों से सवाल जवाब किए। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि आरोपी अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे नरेंद्र दाभोलकर के अभियान के खिलाफ थे। वर्ष 2014 में मामला सीबीआई के पास आने के बाद जांच जारी रही और अब महाराष्ट्र की पुणे की विशेष अदालत ने यह फैसला सुनाया है।
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