नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। हरियाणा सरकार से तीन निर्दलीय विधायकों ने अपना समर्थन वापस ले लिया है। इन निर्दलीय विधायकों में पुंडरी से विधायक रणधीर गोलन, चरखी दादरी से विधायक सोमवीर सांगवान और नीलोखेड़ी से विधायक धर्मपाल गोंदर के नाम शामिल हैं। इन्होने भाजपा से समर्थन वापस ले लिया है और कांग्रेस पार्टी को अपना समर्थन दे दिया है। जिसको लेकर विपक्ष हरियाणा की बीजेपी सरकार को अल्पमत में बता रही है और विधानसभा के चुनाव कराने की मांग कर रही है।
चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है: पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
इसको लेकर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि देश में चुनावी माहौल है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि कौन किधर जाता है और किधर नहीं जाता है। मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि कई विधायक उनकी पार्टी के संपर्क में हैं। इसलिए चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है।
उदय भान ने राज्य में जल्द से जल्द विधानसभा चुनाव कराने की मांग की
हरियाणा की भाजपा सरकार से अपना समर्थन वापस लेने वाले तीनों निर्दलीय विधायकों ने हरियाणा के पूर्व सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा और राज्य के कांग्रेस अध्यक्ष उदय भान की मौजूदगी में एक प्रेस कांफ्रेंस में राज्य की भाजपा सरकार से समर्थन वापस लेने का ऐलान किया। इसको लेकर हरियाणा के कांग्रेस अध्यक्ष उदय भान ने हरियाणा सरकार पर हमला बोला और राज्य में विधानसभा का चुनाव कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि हरियाणा विधानसभा में इस समय 88 विधायक हैं। जिसमे से भाजपा के पास 40 विधायक हैं।
उन्होंने कहा कि पहले जेजेपी और निर्दलीय विधायकों का भाजपा की सरकार को समर्थन था। लेकिन जेजेपी ने राज्य की भाजपा सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था। और अब तीन निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी राज्य की बीजेपी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। उन्होंने कहा कि नायब सिंह सैनी की सरकार अब अल्पमत में है। नायब सिंह सैनी को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्हें अपने पद में बने रहने का हक नहीं है। हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भान ने राज्य में जल्द से जल्द विधानसभा चुनाव कराने की मांग की।
ऐसे में हरियाणा सरकार पर कोई संकट नहीं दिख रहा है
क्या उदय भान का हरियाणा सरकार पर संकट की बात ठीक है? बिल्कुल नहीं, क्योंकि भाजपा के पास अभी भी 45 विधायकों का समर्थन है। जिसमे से 40 विधायक भाजपा के खुद की पार्टी के हैं। उन्हें पांच निर्दलीय विधायकों का अभी भी समर्थन हैं। वहीं कांग्रेस के पास 30 विधायक हैं, अब तीन विधायकों के समर्थन के बाद कांग्रेस के 33 विधायक हैं। अगर जेजेपी पार्टी की बात करें तो वो कांग्रेस को समर्थन नहीं करेगी, अगर जेजेपी पार्टी कांग्रेस को समर्थन भी कर देती है तो भी जेजेपी के 10 विधायक मिलाकर कांग्रेस के पास 43 विधायक ही होंगे। ऐसे में हरियाणा सरकार पर कोई संकट नहीं दिख रहा है।
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