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Tuesday, March 10, 2026
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क्या हैं दुनियाभर में चुनावी चंदा को लेकर नियम? SC का इलेक्टोरल बांड पर प्रतिबंध के बाद गरमाया यह मुद्दा

Electoral Bond: राजनीतिक दलों को चुनावी चंदा का मुद्दा आजकल बहुत गरमा रहा है। इसको लेकर अब दुनियाभर में राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे को भी लोग जानना चाहते हैं।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। राजनीतिक दलों को चुनावी चंदा का मुद्दा आजकल बहुत गरमा रहा है। इसको लेकर अब दुनियाभर में राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे को भी लोग जानना चाहते हैं। चुनावी चंदा का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के द्वारा इलेक्टोरल बांड के जरिये मिलने वाले चंदे पर प्रतिबंध लगाने से शुरू हुआ। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर एसबीआई ने चुनावी चंदा की रिपोर्ट चुनाव आयोग को सौंपी। चुनाव आयोग ने यह रिपोर्ट अपनी वेबसाइट में पब्लिश कर दी। जिसके बाद लोग जानना चाहते हैं कि अन्य देशों में चुनावी चंदे का क्या प्रावधान है।

यहां कॉरपोरेट्स से किसी भी प्रकार का चंदा लेने पर प्रतिबंध है।

हर राजनीतिक पार्टी को अपने चुनाव अभियान को चलाने के लिए फंड की जरुरत पड़ती है। एक रिपोर्ट के अनुसार 163 में से 79 देश ऐसे हैं, जहां राजनीतिक फंड के लिए बैंकिंग सिस्टम से नहीं गुजरना पड़ता है। वहीं 172 में से 48 ऐसे देश हैं जहां कॉरपोरेट्स से राजनीतिक दल फंड नहीं ले सकते हैं, यहां कॉरपोरेट्स से किसी भी प्रकार का चंदा लेने पर प्रतिबंध है।

कुछ देशों में व्यक्तिगत दान की अनुमति नहीं है

पूरी दुनिया में जहां भी लोकतंत्र है, वहां चुनाव की जरुरत होती है। वहीं इन सभी देशों को चुनाव कराने के लिए धन की आवश्यकता होती है। अपने चुनावी कैंपेन को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक दलों को पैसों की जरुरत पड़ती है। यह बात किसी से छुपी नहीं है कि देश में चंदा वैध और अवैध दोनों तरीके से लिया जाता रहा है। जिसमे भ्रष्टाचार की जगह बनी रहती है। इसी को लेकर हर देश में अलग अलग कानून बने हैं। जहां कुछ देशों में व्यक्तिगत दान की अनुमति नहीं है, वही कुछ देशों में व्यक्तिगत दान की अनुमति है। दुनिया में कई ऐसे देश भी हैं जहां चुनावी अभियान के लिए सरकारी खजाने का प्रयोग कर सकते हैं। मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार 172 देशो के चुनावी चंदा के विश्लेषण पर उन्होंने पाया कि इनमे से 48 देश ऐसे पाए गए, जहां कॉरपोरेट्स से चंदा राजनीतिक दलों के लिए प्रतिबंध है। वहीं अन्य 124 देशों में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं था। भारत में भी कॉरपोरेट्स द्वारा अपनी निजी इनकम राजनीतिक दलों को दान की जा सकती है। लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ब्राजील और रूस में ऐसा बिलकुल भी नहीं होता है।

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