Electoral Bond: SC ने SBI को लगाई फटकार, कहा- इलेक्टोरल बॉन्ड की 24 घंटे में दें जानकारी

New Delhi: इलेक्टोरल बॉन्ड मामले में SC ने आज SBI को इलेक्टोरल बॉन्ड की 12 मार्च तक जानकारी साझा करने का आदेश दिया। इसी के साथ 13 मार्च तक EC को अपनी वेबसाइट पर इसको प्रकाशित करने का आदेश दिया।
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने आज इलेक्टोरल बॉन्ड मामले में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी जमा करने के लिए 30 दिन की मोहलत खारिज कर दी है। SC ने 12 मार्च को इलेक्टोरल बॉन्ड की जानका की देने का आदेश दिया। इसी के साथ कोर्ट ने भारतीय चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी इस सूचना को देने का आदेश दिया है।

SC ने SBI की याचिका की खारिज

चीफ जस्टिस की अगुवाई में 5 जजों की बेंच ने मामले की सुनवाई की। इसमें चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि 'SBI ने अपने आवेदन में कहा है कि मांगी गई जानकारी आसानी से उपलब्ध है। इस प्रकार 30 जून तक समय बढ़ाने की मांग करने वाला SBI का आवेदन खारिज किया जाता है।' SBI की ओर से पेश वकील हरीश साल्वे ने कहा कि 'हम जानकारी एकत्र करने की कोशिश कर रहे हैं और हमें पूरी प्रक्रिया को उलटना पड़ रहा है। SBI एक बैंक होने के नाते इस जानकारी को गुप्त रखना चाहिए।'

SC ने दिया आदेश

हालांकि जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि 'आपको केवल सीलबंद लिफाफा खोलना होगा, इलेक्टोरल बॉन्ड एकत्र करना होगा और जानकारी देनी होगी। ECI को एक सीलबंद लिफाफे में इलेक्टोरल बॉन्ड दाखिल करने के लिए कहा गया है। बेंच ने SBI से पूछा 'पिछले 26 दिनों में आपने क्या कदम उठाए हैं?

13 मार्च तक EC की वेबसाइट पर जानकारी हो प्रकाशित

इस मामले में 15 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ ने केंद्र की चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया था। इस योजना में गुमनाम राजनीतिक फंडिंग को अनुमति दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस योजना को असंवैधानिक बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने SBI को 6 मार्च तक दानदाताओं द्वारा दान की गई राशि और प्राप्तकर्ताओं का इलेक्टोरल बॉन्ड चुनाव आयोग को देने का आदेश दिया था। आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को 13 मार्च तक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी प्रकाशित करने का आदेश दिया है।

चुनावी बांड योजना की जानकारी देने अनिवार्य

इस मामले में चीफ जस्टिस ने कहा कि "चुनावी बॉन्ड योजना के खंड 7(4) में कहा गया है कि चुनावी बॉन्ड के खरीदार द्वारा दी गई जानकारी को अधिकृत बैंक द्वारा गोपनीय माना जाएगा और मांगे जाने पर इसका खुलासा किया जाएगा। ऐसा करें या कानून प्रवर्तन एजेंसी द्वारा अपराध का पंजीकरण करें। इस प्रकार चुनावी बॉन्ड योजना के अनुसार ही SBI से मांगे जाने पर जानकारी का खुलासा करना अनिवार्य है।"

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