नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण कम होने का नाम नहीं ले रहा। आए दिनों AQI 700 के पार भी जा चुका था। भारत के प्रदूषित क्षेत्रों में से दिल्ली पहले स्थान पर रहा। इसी बीच सरकार ने प्रदूषण कम कराने के लिए GRAP Stage 4 भी लागू कर दिया था। इसके बावजूद दिल्ली का प्रदूषण कम नहीं हो रहा हैं। खबरों के मुताबिक, प्रदूषण पर कंट्रोल के लिए IIT कानपुर कृत्रिम बारिश (Artificial Rain) करने के लिए तैयार है।
IIT के अफसरों का क्या कहना हैं?
IIT कानपुर के प्रशासनिक अफसरों का कहना है कि कि दिल्ली सरकार की तरफ से जैसे ही कृत्रिम बारिश को लेकर मदद की मांग होगी वैसे ही उनकी टीम इसे करा देगी। दिल्ली सरकार को इसके लिए महानिदेशालय और गृह मंत्रालय से अनुमति लेनी होगी।
कृत्रिम बारिश कैसे होती है?
IIT कानपुर के विशेषज्ञों ने बताया कि जहां कही भी कृत्रिम बारिश कराई जाती है तो वहां पर ड्रोन सिस्टम का प्रयोग नहीं होता इसके बजाय अमेरिका से मंगाए गए सेना के विमान से कृत्रिम बारिश कराई जाती है।
एक बार कृत्रिम बारिश कराने पर 100 वर्ग किमी क्षेत्र में लगभग एक करोड़ रुपये का खर्चा आता है। इसके अलावा बारिश कराने के लिए उस क्षेत्र में बादलों का होना भी जरुरी है। अगर बादल घने होंगे तो नमी ज्यादा होगी फिर बारिश की संभावना भी बढ़ जाती है। कृत्रिम बारिश का फायदा यह भी है कि अगर एक बार बारिस कराया जाए तो 10 से 15 दिनों तक प्रदूषण से राहत मिलती है।
IIT कानपुर की टीम प्रदूषण कम और कृत्रिम बारिश कराने के लिए तैयार
कानपुर IIT के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने बताया कि उनकी टीम कृत्रिम बारिश कराने के लिए हमेशा ही तैयार है। मगर इसके लिए उस राज्य से पत्र आना जरुरी है जहां कृत्रिम बारिश करानी है। अगर दिल्ली सरकार IIT कानपुर से कृत्रिम बारिश कराना चाहते हैं तो IIT कानपुर की टीम दिल्ली में कृत्रिम बारिश जरुर कराएगी।





