Bihar Politics: फ्लोर टेस्ट से पहले 7 फरवरी को CM नीतीश कुमार दिल्ली में PM मोदी से करेंगे मुलाकात

Patna News: बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा के बाद अब नीतीश कुमार भी फ्लोर टेस्ट से पहले दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करेंगे।
CM Nitish Kumar
CM Nitish Kumar Raftaar.in

पटना, हि.स.। फ्लोर टेस्ट के पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 7 फरवरी को दिल्ली जाएंगे। नीतीश कुमार दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करेंगे। नीतीश दो दिन के लिए दिल्ली दौरे पर जाएंगे, जहां वह प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात करेंगे। मंत्रिमंडल के विस्तार और फ्लोर टेस्ट के पहले यह मुलाकात अहम मानी जा रही है।

12 फरवरी को होगा फ्लोर टेस्ट

इससे पूर्व उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा प्रधानमंत्री सहित भाजपा के आलाकमान से मुलाकात कर चुके हैं। 12 फरवरी को विधानसभा में बिहार की नई एनडीए सरकार का फ्लोर टेस्ट होना है। इस दिन नीतीश सरकार विधानसभा में अपना बहुमत साबित करेगी।

आज झारखंड में संपन्न हुआ फ्लोर टेस्ट

झारखंड में आज विधानसभा का विशेष सत्र चल रहा है। इस विशेष सत्र में झारखंड के नए सीएम चंपाई सोरेन ने विश्वास मत का प्रस्ताव पेश किया है। इस दौरान चंपाई सोरेन ने हेमंत सोरेन सरकार में किए कार्यों को गिनाया। चंपई सोरेन सरकार आज झारखंड विधानसभा में अपना बहुमत साबित किया। विश्वास प्रस्ताव पर वाद-विवाद के बाद वोटिंग हुई। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी वोट किया। ईडी कोर्ट ने उन्हें पहले ही इसकी अनुमति प्रदान कर दी थी। विश्वास मत पर वोट देने के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायक रविवार रात में ही विशेष विमान से हैदराबाद से रांची पहुंचे थे।

क्या होता है फ्लॉर टेस्ट?

फ्लोर टेस्ट उस प्रक्रिया को कहा जाता है जिसमें मुख्यमंत्री विधानसभा में ये साबित करते हैं कि उनकी सरकार को अभी भी विधायकों का समर्थन प्राप्त है या नहीं। राज्यपाल मुख्यमंत्री को विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए कहते हैं। दरअसल विधानसभा में जिस भी पार्टी को बहुमत प्राप्त होता है, राज्यपाल उस दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करते हैं। लेकिन जब इस बहुमत पर सवाल उठाया जाता है तो उसी दल के नेता को विधानसभा में बहुमत साबित करना होता है। इस दौरान अगर मुख्यमंत्री बहुमत साबित करने में नाकाम होते हैं तो उन्हें इस्तीफा देना पड़ता है। यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है तो संसद और विधानसभा दोनों जगह होती है। विधानसभा में फ्लोर टेस्ट विधानसभा के अध्यक्ष कराते हैं। राज्यपाल की इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की दखल अंदाजी नहीं होती। वह केवल मुख्यमंत्री को बहुमत साबित करने का आदेश देते हैं।

कैसे होता है फ्लोर टेस्ट?

फ्लोर टेस्ट के दौरान सभी विधायकों को विधानसभा में मौजूद रहना पड़ता है। इसके बाद वह अपना-अपना वोट देते हैं। इससे पहले सभी पार्टियां विधायकों को हर हाल में विधानसभा में पेश होने के लिए व्हिप जारी करती हैं। वहीं कोई भी भी विधायक अगर व्हिप का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ दल बदल कानून के तहत कार्रवाई होती है।

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