नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । शंभू बॉर्डर पर अपनी मांगों को लेकर मोर्चा लगाकर बैठे किसानों को सरकार से बातचीत का न्यौता न आने पर वे एक बार फिर दिल्ली कूच करेंगे। पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू सीमा पर किसान नेताओं ने शनिवार को कहा कि 101 किसानों का एक समूह रविवार दोपहर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की ओर शांतिपूर्ण पैदल मार्च शुरू करेगा। किसान अंबाला के पास एकत्र हुए हैं, जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई है।
दरअसल, प्रदर्शनकारी किसानों ने शुक्रवार को दिल्ली की ओर मार्च करने का प्रयास किया था, लेकिन हरियाणा पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। जिससे प्रदर्शन कर रहे किसानों में से कुछ के घायल होने के बाद किसानों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया। किसान यूनियन के नेताओं ने शनिवार को अपना आंदोलन रोकने का फैसला किया, ताकि वे सुन सकें कि केंद्र को उनकी मांगों के बारे में क्या कहना है, जिसमें सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी और कृषि ऋण माफी शामिल है।
क्या बोले सरवन सिंह पंढेर ?
शंभू बॉर्डर पर किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि “हमें अभी तक केंद्र से बातचीत के बारे में कोई संदेश नहीं मिला है। भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार बातचीत करने के मूड में नहीं है। अगर बातचीत शुरू होती, तो समाधान निकल सकता था। हमारे लिए सत्तारूढ़ दल (केंद्र में) और विपक्ष एक ही हैं – वे सभी सिर्फ राजनीति में लगे हुए हैं।
गौरतलब है कि किसानों ने इससे पहले 13 फरवरी और 21 फरवरी को राष्ट्रीय राजधानी में मार्च करने का प्रयास किया था, लेकिन पंजाब-हरियाणा सीमा पर शंभू और खनौरी में सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक दिया था। वे कर्ज माफी, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन और बिजली दरों में बढ़ोतरी पर रोक लगाने की भी मांग कर रहे हैं। भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 को बहाल करना और 2020-21 के आंदोलन के दौरान मरने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा देना भी उनकी मांगों का हिस्सा है।





