नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर हाल ही में कई दावे सामने आए हैं, जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगियों ने इसे अपनी बड़ी जीत के रूप में पेश किया। लेकिन नई रिपोर्ट में इन दावों पर सवाल उठाए गए हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, मोदी सरकार ने वाशिंगटन को स्पष्ट संकेत दिया था कि वह ट्रंप के पूरे कार्यकाल के दौरान ट्रेड डील पर जल्दबाजी में समझौता करने के मूड में नहीं है, बल्कि इंतजार करने को तैयार है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो को संदेश भेजा कि “बुली करने की नीति बंद करें,” जिसके बाद अमेरिका ने अपनी स्थिति पर पुनर्विचार किया और लाइन में आने का संकेत दिया।
अजीत डोभाल ने अमेरिका को दी स्पष्ट चेतावनी
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें अजीत डोभाल और मार्को रुबियो आमने-सामने आए। इस बैठक में भारत ने अपनी स्पष्ट और सख्त स्थिति सामने रखी। बैठक का समय खासा संवेदनशील था, क्योंकि उस दौरान ट्रंप प्रशासन लगातार मोदी सरकार पर दबाव डाल रहा था और अमेरिकी उत्पादों पर 50% तक की ऊंची टैरिफ दरें लागू कर दी गई थीं, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक थीं। भारत ने इस पर अपना रुख बिल्कुल स्पष्ट किया और संकेत दिया कि अपने हितों के बिना समझौता नहीं होगा।
भारत ने ट्रंप डील पर किया इंतजार का संकेत
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 की बैठक में अजीत डोभाल ने अमेरिका के रूबियो से साफ कहा कि “भारत को ट्रंप या उनके सहयोगियों से दबाया नहीं जा सकता। भारत पूरे राष्ट्रपति कार्यकाल तक किसी भी जल्दबाजी के बजाय डील पर हस्ताक्षर करने के लिए इंतजार करने को तैयार है, क्योंकि देश पहले भी ऐसे कठिन अमेरिकी प्रशासन का सामना कर चुका है।” इस जानकारी को नई दिल्ली के कुछ अधिकारियों ने ब्लूमबर्ग को दी, जिन्होंने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह विवरण साझा किया। भारत का विदेश मंत्रालय और अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट दोनों ने इस बैठक पर किसी भी तरह की टिप्पणी नहीं की है।
अजीत डोभाल की रणनीति काम आई
बैठक में अजीत डोभाल ने अमेरिका के रूबियो से यह संदेश दिया कि नई दिल्ली चाहती है कि ट्रंप और उनके सहयोगी भारत के खिलाफ सार्वजनिक आलोचना कम करें। उनका मकसद दोनों देशों के संबंधों को स्थिर करना था। बैठक के बाद अमेरिका की भाषा में नरमी दिखाई दी। इसका नतीजा यह भी रहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने सितंबर में प्रधानमंत्री मोदी को उनके जन्मदिन पर फोन कर बधाई दी। यह संकेत माना गया कि भारत की स्पष्ट रणनीति ने अमेरिका के रुख पर असर डाला।
ट्रंप टीम ने पीएम मोदी पर लगाए आरोप
राष्ट्रपति ट्रंप और उनके सहयोगियों ने पीएम मोदी को लेकर कड़ा रुख अपनाया। विशेष रूप से पीटर नवारो ने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत ने पाकिस्तान के साथ संघर्ष में झूठे दावे किए। नवारो ने यह भी आरोप लगाया कि रूस-यूक्रेन युद्ध को मोदी का युद्ध के रूप में पेश किया गया क्योंकि भारत रूसी तेल खरीद रहा था। सिर्फ राजनीतिक आरोप ही नहीं, बल्कि नवारो ने मोदी की संस्कृति और धार्मिक प्रतीकों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने उस फोटो पर आपत्ति जताई जिसमें पीएम मोदी भगवा वस्त्र धारण किए, लाल तिलक और थिरूनेरू (विभूति) लगाए हुए नजर आए थे।
भारत ने ट्रंप के दावों को ठुकराया
मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन चले युद्ध के दौरान हुई सीजफायर की बात को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने तरीके से पेश किया, लेकिन भारत ने इसे खारिज कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद जो पहले तक अच्छे चल रहे थे, भारत-अमेरिका संबंध अचानक तनावपूर्ण हो गए।
इसके बाद ट्रंप ने रविवार को बिना किसी औपचारिक प्रक्रिया के अपने प्लेटफॉर्म Truth Social पर घोषणा कर दी कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील पूरी हो गई और उन्होंने पीएम मोदी से बात की। पीएम मोदी ने इस बातचीत की पुष्टि की, लेकिन ट्रेड डील पर कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की। वहीं, भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों देशों ने ट्रेड डील को अंतिम रूप देने में सफलता हासिल की है। बताया कि इस डील पर फरवरी 2025 से दोनों पक्षों के बीच चर्चा जारी थी।
ट्रंप की एकतरफा घोषणा पर विपक्ष ने उठाए सवाल
ट्रंप ने बिना किसी औपचारिक प्रक्रिया के भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा कर दी, जिससे मोदी सरकार को देश में आलोचनाओं और सवालों के घेरे में रहना पड़ा। डील के विवरण सार्वजनिक न होने की वजह से विपक्ष और विश्लेषक इसका विरोध कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि अमेरिका ने भारत पर तेल और कृषि उत्पादों से जुड़ी शर्तें मानने का दबाव डाला। इस स्थिति में सरकार न तो पूरी तरह खुलकर कुछ कह सकती है और न ही डील को खारिज कर सकती है। लेकिन अजीत डोभाल की रुबियो से यह बातचीत कि भारत ट्रंप के पूरे राष्ट्रपति कार्यकाल तक डील के लिए इंतजार करने को तैयार है, यह दर्शाती है कि मोदी सरकार ने कोई ऐसी शर्त स्वीकार नहीं की जो देशहित के खिलाफ होती।
ट्रंप के पूरे कार्यकाल तक इंतजार का मतलब क्या है?
अमेरिकी राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है और कोई व्यक्ति अधिकतम दो कार्यकाल तक इस पद पर रह सकता है। ट्रंप ने जनवरी 2025 में राष्ट्रपति का पद संभाला है। इसका मतलब यह है कि अगर भारत पूरी तरह उनकी शर्तों के बिना ट्रेड डील के लिए इंतजार करता, तो इसे पूरा होने में 2029 तक का समय लग सकता था।





