नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। जनवरी 2026 में होने वाले चंडीगढ़ मेयर चुनाव से पहले नगर निगम की राजनीति में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस वक्त करारा झटका लगा, जब उसके दो पार्षदों ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम से न सिर्फ नगर निगम का नंबर गेम बदल गया है, बल्कि आगामी मेयर चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं।
AAP के दो पार्षद BJP में शामिल
चंडीगढ़ नगर निगम में आम आदमी पार्टी की पार्षद सुमन देवी और पूनम देवी ने पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। दोनों नेताओं के इस कदम को AAP के लिए बड़ा राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब मेयर चुनाव में कुछ ही महीने बाकी हैं। बीजेपी नेतृत्व ने दोनों पार्षदों का स्वागत करते हुए इसे पार्टी की नीतियों और नेतृत्व पर भरोसे का संकेत बताया है।
नगर निगम में बदला सियासी समीकरण
दो पार्षदों के बीजेपी में शामिल होते ही नगर निगम में ताकत का संतुलन बदल गया है। अब तक बीजेपी के पास 16 पार्षद थे, लेकिन यह संख्या बढ़कर 18 हो गई है। वहीं, आम आदमी पार्टी के पार्षदों की संख्या घटकर 11 रह गई है, जो पहले 13 थी। कांग्रेस की स्थिति जस की तस बनी हुई है और उसके पास 6 पार्षद हैं। इसके अलावा, चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का एक वोट भी मेयर चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाता है।
बहुमत का आंकड़ा और नंबर गेम
चंडीगढ़ नगर निगम में कुल 35 पार्षद हैं और मेयर चुनाव में सांसद के एक वोट को मिलाकर कुल 36 वोट होते हैं। बहुमत के लिए 19 वोटों की जरूरत होती है। मौजूदा स्थिति में बीजेपी 18 पार्षदों के साथ बहुमत से सिर्फ एक कदम दूर है। अगर कांग्रेस सांसद का समर्थन या किसी अन्य पार्षद का साथ बीजेपी को मिल जाता है, तो मेयर चुनाव में उसकी स्थिति बेहद मजबूत हो सकती है।
पिछले मेयर चुनाव का असर
गौरतलब है कि जनवरी 2025 में हुए मेयर चुनाव में भी बीजेपी ने कम पार्षद होने के बावजूद जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में बीजेपी की उम्मीदवार हरप्रीत कौर बबला को 19 वोट मिले थे, जबकि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की संयुक्त उम्मीदवार प्रेम लता को 17 वोटों से संतोष करना पड़ा था। यह परिणाम पहले ही साफ कर चुका था कि चंडीगढ़ में मेयर चुनाव केवल संख्या का नहीं, बल्कि रणनीति और समर्थन का भी खेल है।
AAP के लिए बढ़ी चुनौती
दो पार्षदों के पार्टी छोड़ने से आम आदमी पार्टी की स्थिति कमजोर हुई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे AAP की चुनावी रणनीति पर असर पड़ेगा और पार्टी को अपने बचे हुए पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। वहीं, कांग्रेस की भूमिका भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि उसका समर्थन किसी भी पक्ष को बहुमत तक पहुंचा सकता है।
BJP के हौसले बुलंद
बीजेपी के लिए यह घटनाक्रम मनोबल बढ़ाने वाला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चंडीगढ़ में विकास और स्थिरता के मुद्दे पर पार्षदों का बीजेपी से जुड़ना जनता की भावना को दर्शाता है। मेयर चुनाव से पहले बीजेपी अब खुद को मजबूत स्थिति में मान रही है।
मेयर चुनाव में अभी समय बाकी है, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि चंडीगढ़ की सियासत आने वाले दिनों में और गर्म होने वाली है। AAP, BJP और कांग्रेस-तीनों दलों की रणनीति और आपसी समीकरण ही तय करेंगे कि मेयर की कुर्सी किसके हाथ लगेगी।





