नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को विदेशी स्टील आयात (Steel Imports) पर टैरिफ को दोगुना करने का ऐलान किया। ट्रंप ने विदेशी इस्पात आयात पर टैरिफ 25% से बढ़ाकर 50% करने की घोषणा की है। इस फैसले पर उनका कहना है कि, टैरिफ का उद्देश्य अमेरिकी इस्पात उद्योग को बढ़ावा देना है। उन्होंने यह कदम ऐसे समय पर उठाया है, जब अमेरिका और चीन के बीच महत्वपूर्ण खनिजों और टेक्नोलॉजी के ट्रेड में तनाव चरम पर है।
ट्रंप ने शुक्रवार (30 मई) को पिट्सबर्ग में स्थित यूएस स्टील के मोन वैली वर्क्स-इरविन प्लांट में यह घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका का भविष्य शंघाई के घटिया स्टील पर निर्भर करने के बजाय, पिट्सबर्ग की ताकत और गौरव के साथ निर्मित किया जाना चाहिए।
चीन को आर्थिक चोट देने की मंशा
ट्रंप ने स्टील पर टैरिफ बढ़ाने के फैसले पर कहा कि वह घरेलू स्टील उत्पादकों को बढ़ावा देना चाहते हैं। इसके साथ ही अमेरिकी निर्माण उद्योग को मजबूत और गति प्रदान करने की पहल पर काम करना चाहते है। ट्रंप के इस फैसले से अमेरिका चीन पर अमेरिका व्यापारिक का दबाव बना कर उसे आर्थिक नुकसान पहुंचाना चाहता है। टैरिफ बढ़ाने की पीछे यूएस स्टील-निप्पॉन डील को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
बता दें कि, अमेरिका के आवास, ऑटोमोटिव और निर्माण जैसे उद्योग इस्पात पर ज्याादातर निर्भर है। टैरिफ बढ़ने से इन क्षेत्रों में लागत बढ़ सकती है, जिससे उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी जा सकती है। इससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। हालांकि, टैरिफ बढ़ाने के फैसले से चीन, कनाडा, यूरोप से आयात पर भरोसा कम हो जाएगा।
यूएस स्टील और निप्पॉन डील
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नई ब्लॉकबस्टर डील की घोषणा की, जिसमें जापान की निप्पॉन स्टील अमेरिकी कंपनी यूएस स्टील का अधिग्रहण करेगी, लेकिन कंपनी को अमेरिका ही नियंत्रण करेगा। इस व्यवस्था में एक अमेरिकी नेतृत्व टीम और एक विशेष वीटो शक्ति (गोल्डन शेयर) का प्रावधान शामिल है। हालांकि, इस डील के स्पष्ट विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, फिर भी इसे अमेरिकी कंपनी को विदेशी अधिग्रहण से बचाने की रणनीति के रूप में प्रस्तुत किया गया है।




