नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस की दो दिवसीय यात्रा के लिए आज रवाना हो गए। वो रूस में आयोजित हो रहे 22वें भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। पीएम मोदी रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार रूस जा रहे हैं। इसी समय अमेरिका में नाटो समिट भी हो रहा है। जिसके बाद इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। पश्चिमी देश भारत और रूस के बीच होने वाले सम्मेलन पर नजर बनाये हुए हैं। नाटो समिट को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि मोदी के रूस दौरे का नाटो समिट से कोई लेनादेना नहीं है। इससे पहले पीएम मोदी 2019 में रूस गए थे।
पीएम मोदी ने दी जानकारी
इस संबंध में प्रधानमंत्री ने कहा है कि भारत और रूस के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी पिछले 10 सालों में काफी आगे बढ़ी है। इनमें ऊर्जा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन और लोगों के बीच आदान-प्रदान शामिल है। मैं अपने मित्र राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा करने और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर दृष्टिकोण साझा करने के लिए उत्सुक हूं। हम एक शांतिपूर्ण और स्थिर क्षेत्र के लिए एक सहायक भूमिका निभाना चाहते हैं। यह यात्रा मुझे रूस में वाइब्रेंट इंडियन कम्युनिटी से मिलने का अवसर भी प्रदान करेगी।
क्रेमलिन ने पश्चिमी देशों पर साधा निशाना
वहीं क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मोदी के रूस दौरे को लेकर पश्चिमी देशों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा को पश्चिमी देश ईर्ष्या की नजर से देखते हैं। उन्होंने कहा कि रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के बुलावे पर पीएम मोदी 8 और 8 जुलाई को मॉस्को में रहेंगे इसके बाद वो ऑस्ट्रिया चले जाएंगे।
इन मुद्दों पर होगी बात
पीएम मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार रूस के दौरे पर हैं। इस दौरान कई मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है। दरअसल रूस के द्वारा यूक्रेन पर हमला किए जाने के बाद अमेरिका ने रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं। प्रतिबंध के बावजूद भारत लगातार रूस के साथ व्यापार करता रहा। जिसमें भारत के द्वारा तेल का आयात करना प्रमुख है। रूस-यूक्रेन जंग के बाद ये व्यापार तेजी से बढ़ा है। साल 2023-24 वित्तीय वर्ष में भारत ने 45.4 लाख करोड़ रुपये का कच्चा तेल खरीदा था। वहीं भारत और रूस के बीच 54 लाख करोड़ रुपये का व्यापार हुआ था। जिसमें भारत ने सिर्फ 3.3 लाख करोड़ का निर्यात किया। पीएम मोदी भारत और रूस के बीच इस व्यापारिक असमानता पर बातचीत कर सकते हैं।
एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर हो सकती है बात
इसके अलावा भारत ने 2018 में रूस के साथ S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के लिए डील की थी। 2023 में इनकी डिलिवरी होनी थी, लेकिन रूस और यूक्रेन युद्ध की वजह से इसमें देरी हुई। इस दौरे के दौरान पीएम मोदी इसको लेकर बात कर सकते हैं। वहीं भारत और रूस के बीच व्यापार बढ़ाने और उसकी लागत को कम करने के संबंध में भी बातचीत हो सकती है।
वहीं भारत ने ईरान के चाबहार पोर्ट को 10 साल के लिए लीज पर लिया है। भारत इसके जरिये सेंट्रल एशिया से होते हुए रूस के साथ नए ट्रेड रूट शुरू करने को लेकर बात कर सकता है। भारत इस रूट की मदद से ईरान, अफगानिस्तान, अर्मेनिया, अरजबैजान, मध्य एशिया और यूरोप के साथ सीधे व्यापार कर सकता है।
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