नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत के साथ शांति वार्ता को लेकर पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने व्यापार और आर्थिक सहयोग से लेकर आतंकवाद-निरोध के कई मुद्दों पर बातचीत के लिए इस्लामाबाद की इच्छा दोहराई है। जहां इशाक डार ने कहा कि गेंद अब भारत के पाले में पाकिस्तान अभी भी नई दिल्ली से औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतज़ार कर रहा है। जिसमें अटलांटिक काउंसिल थिंक टैंक के साथ बातचीत में इशाक डार ने भारत के साथ काम करने और सहयोग करने के लिए इच्छा जताई है।
बता दे, भारत में 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम अटैक होने के बाद जहां भारत द्वारा सिंदूर ऑपरेशन को अंजाम दिया था। जिसके बाद भारत की ओर से पाकिस्तान की ओर साझा कर रही सिंधु नदी को रोक दिया गया था। जिसमें तीन दिन लगातार सैन्य हमले और जवाबी कार्रवाई की गई। जिसके बाद 10 मई को दोनों देशों के सहमति के बाद सीजफायर लागू किया गया। और सिंधु नदी को भी बहाल किया गया। अब वहीं भारत के साथ शांति वार्ता की एक पहल के रूप में में पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने अटलांटिक काउंसिल थिंक टैंक के साथ बातचीत के दौरान डार ने कहा कि पाकिस्तान व्यापार से लेकर आतंकवाद-निरोध तक सभी मोर्चों पर भारत के साथ काम करने और सहयोग करने के लिए तैयार है।
बता दे, पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने सार्थक वार्ता की आवश्यकता पर बल दिया है, और समग्र वार्ता को फिर से शुरू करने का आह्वान किया है। जो एक ऐसा ढांचा है जिसका उपयोग कभी दोनों देशों द्वारा कश्मीर सुरक्षा लोगों के बीच आदान-प्रदान और आर्थिक संबंधों सहित चिंताओं को दूर करने के लिए किया जाता था।
पाकिस्तान की ओर से ये प्रस्ताव ऐसे समय पर आया है जब दोनों देशों के बीच में तनाव चल रहा है, जिसमें भारत ने पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान में नौ आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया था। पहलगाम हमले में बैसरन घाटी में 26 निर्दोष पर्यटकों की निर्दयतापूर्वक हत्या कर दी गई थी। भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव के मुद्दे पर डार ने द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता, आतंकवाद निरोध को लेकर वैश्विक शांति पहलों पर चर्चा करने वाशिंगटन में विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। जहां उन्होने युद्ध विराम की सुविधा प्रदान करके दो परमाणु-सशस्त्र राज्यों के बीच व्यापक संघर्ष को टालकर देशों के बीच तनाव को कम करने में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रुबियो द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका की तारीफ भी की है।
पाकिस्तान का ये बयान ऐसे समय में आया है जब भारत लगातार यह कहता रहा है कि युद्धविराम समझौता भारतीय और पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व के बीच एक द्विपक्षीय निर्णय था, जिसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भागीदारी नहीं थी। वहीं विदेश मंत्री ने द रेजिस्टेंस फ्रंट को एक विदेशी आतंकवादी संगठन और एक विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित करने के संयुक्त राज्य अमेरिका के फैसले पर भी अपना रुख बदलते हुए दिखाई दिए।




