नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स को लेकर एक बुरी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने इस संबंध में बड़ा अपडेट देते हुए कहा है कि अब सुनीता विलियम्स अगले साल फरवरी में ही धरती पर वापस लौट सकती हैं। गौरतलब है कि 5 जून को महज 8 दिनों के लिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर गईं सुनीता विलियम्स अभी भी वहां पर फंसी हुई हैं। हालांकि उन्हें किस यान से धरती पर वापस लाया जाएगा, इस संबंध में कोई फैसला नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि अगर सुनीता विलियम्स SpaceX के यान से धरती पर वापस लौटती हैं तो उन्हें काफी दिनों तक अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में रुकना पड़ सकता है।
SpaceX ड्रैगन से वापस आएंगी सुनीता
इस संबंध में नासा ने पिछले दिनों एक अपडेट दिया था। जिसमें उसने कहा था कि सुनीता विलियम्स और उनके साथी एस्ट्रोनॉट बैरी विल्मोर को कम से कम 2025 के शुरुआत तक अंतरिक्ष में ही रहना पड़ेगा। नासा दोनों एस्ट्रोनॉट को बोइंग के स्टारलाइनर के बजाये SpaceX ड्रैगन का उपयोग कर वापस धरती पर लाएगा।
क्या है मामला ?
दरअसल 5 जून 2024 को सुनीता विलियम्स और बैरी विल्मोर को बोइंग के स्टारलाइनर से नासा ने 8 दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजा था। स्पेस में पहुंचते ही स्टारलाइनर में खराबी आ गई। जिसकी वजह से दोनों अंतरिक्ष यात्री, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में ही फंस गए। अब जानकारी आ रही है कि लंबे समय से अंतरिक्ष में रहने के कारण अंतरिक्ष यात्रियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कुछ दिनों पहले एक खबर आई थी कि उनके पास अब सिर्फ 90 घंटों का ही ऑक्सीजन बचा है।
अंतरिक्ष में क्या होती है परेशानी ?
अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने पर अंतरिक्ष यात्रियों को स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण माइक्रोग्रैविटी है। वहीं अंतरिक्ष में यात्रियों को एनीमिया होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। क्योंकि किसी भी व्यक्ति के शरीर में पृथ्वी की तुलना में लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से खत्म होती हैं। धरती पर जहां प्रति सेकंड 2 मिलियन लाल रक्त कोशिकाएं खत्म होती हैं। तो वहीं अंतरीक्ष में ये बढ़कर तीन मिलियन प्रति सेकंड हो जाता है। वहीं इस संबंध में जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार अंतरिक्ष में पहले 10 दिनों के अंदर ही खून में मौजूद लाल रक्त कोशिकाएं 12 फीसदी तक कम हो जाती हैं।
ऑर्थोस्टेटिज्म की हो सकती है परेशानी
इसके अलावा 2022 में नचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक सीरम में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है। इसके अलावा ऑर्थोस्टेटिज्म की भी दिक्कत होती है। ये रिसर्च 14 अंतरिक्ष यात्रियों पर किया गया है। अगर यात्री धरती पर आता है तो सबसे बड़ी परेशानी लाल रक्त कोशिकाओं के खत्म होने की समस्या हो सकती है। इसके अलावा हड्डियों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
बोइंग के स्टारलाइन में क्या हो रही परेशानी ?
अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बैरी 5 अगस्त को बोइंग के स्टारलाइनर कैप्सूल से स्पेस स्टेशन गए थे। सबसे बड़ी समस्या इस कैप्सूल में है। इसमें एक नहीं बल्कि कई समस्याएं है। सबसे बड़ी समस्या कैप्सूल में 5 जगहों से हीलियम गैस का लीक होना है। हीलियम यान के प्रोपल्शन सिस्टम को प्रेशर देता है। वहीं इस कैप्सूल के थ्रस्टर 5 बार फेल हो चुके हैं। जिसकी वजह से इस यान का रिएक्शन कंट्रोल सिस्टम खराब हो गया। इसका अर्थ ये हुआ कि अगर इस कैप्सूल में बैठकर सुनीता और बैरी धरती पर आने की कोशिश करेंगे तो इसका नियंत्रण उनके पास नहीं होगा। वहीं अगर वो इस कैप्सूल से आने की कोशिश करें और ये फेल्योर अंतरिक्ष में ही हो गया तो दोनों हमेशा के लिए अंतरिक्ष की अनंत गहराइयों में खो जाएंगे। वहीं अगर वो धरती के वायुमंडल में प्रवेश कर गए और इसका रिएक्शन कंट्रोल सिस्टम खराब हो गया। तो कैप्सूल अनियंत्रित गति से धरती पर गिरेगा। जिसके चलते इनके बचने के चांस ना के बराबर हो जाते हैं।
यात्रा शुरू होने से पहले ही स्टारलाइनर में आई थी दिक्कतें
गौरतलब है कि नासा और बोइंग को यात्रा के शुरू होने से पहले ही इन दिक्कतों के बारे में पता था। इसके बावजूद इस मिशन को रोका नहीं गया। इसे पहले 7 मई को लॉन्च किया जाना था लेकिन स्टारलाइनर में आ रही दिक्कतों की वजह से इसे 5 जून को शुरू किया गया। अब नासा के इस फेल्योर पर लोग तरह तरह के सवाल उठा रहे हैं।
बोइंग स्टारलाइनर क्या है ?
दरअसल बोइंग का स्टारलाइनर एक अंतरिक्ष यान है। इसका लक्ष्य नासा के अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में ले जाना है। इसने 5 जून के उड़ान से पहले अपने उद्घाटन मिशन के दौरान दो मानवरहित उड़ानें पूरी की है। स्टारलाइनर में पुशर एबॉर्ट सिस्टम लगा हुआ है। जो चालक को मिशन के लॉन्च और चढ़ाई के दौरान चरणों को सुरक्षित रूप से पूरी करने की अनुमति देता है।
अपने आप उड़ सकता है यह यान
इसके अलावा यह यान अपने आप उड़ सकता है और सही रास्ता खोज सकता है। यह एक आधुनिक स्वचालित कारों की तरह काम करता है। जिसमें अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष यान उड़ाना नहीं पड़ता। जिसकी वजह से अंतरिक्ष यात्री बिना किसी हस्तक्षेप के अंतरिक्ष में जा सकते हैं। इसके अलावा इस यान को अंतरिक्ष यात्री खुद भी नियंत्रित कर सकते हैं।





