नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स अपने साथी अंतरिक्ष यात्री बुच विलमोर के साथ स्पेस में फंस गई हैं। इनके पास केवल 96 घंटे का ऑक्सीजन बचा है। दरअसल उन्हें 5 जून को वापस आना था, लेकिन अब उन्हें 8 महीनों तक वहीं रुकना होगा।
वापसी के लिए स्पेस एक्स क्रू पर निर्भर
इस संकटग्रस्त स्थिति में इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि उन्हें अब वापसी के लिए स्पेस एक्स के क्रू ड्रैगन पर निर्भर रहना पड़ेगा। नासा अब इस गंभीर निर्णय पर विचार कर रही है कि अंतरिक्ष यात्रियों को स्टारलाइनर से वापस लेकर आया जाए या फिर स्पेस एक्स रेस्क्यू मिशन के साथ आगे बढ़ा जाए।
धरती पर लौटने के लिए पोजीशन सही होनी चाहिए
US मिलिट्री स्पेस सिस्टम के पूर्व कमांडर रूडी रिडोल्फी ने कहा कि स्टारलाइनर को वापस धरती पर लाने के लिए उसकी पोजीशन सही होनी चाहिए। अगर एलाइनमेंट सही नहीं हुआ तो इसके भयावह परिणाम हो सकते हैं। स्पेसएक्स अंतरिक्ष यात्रियों को वापस ला सकता है पर तब उन्हें फरवरी तक वहीं रहना होगा। अगर नासा स्पेस एक्स मिशन को जारी रखता है तो स्टारलाइनर को सितंबर में खाली वापस आना पड़ेगा। अगर थ्रस्टर में खराबी आ आती है तो स्टारलाइनर अंतरिक्ष में फंसा रह सकता है।
दरअसल बोइंग ने अपनी पहली बोइंग फ्लाइट 5 जून को लॉन्च की थी। स्पेस एक्स और नासा के कमर्शियल क्रू प्रोग्राम के तहत एक कॉन्ट्रैक्ट हुआ था जिसके अनुसार ऑपरेशनल मिशन की शुरुआत स्पेस स्टेशन से होनी थी।
क्या होगी सबसे खराब परिस्थिति
सबसे खराब परिस्थिति वो होगी जब स्पेसक्राफ्ट 2 स्टीप एंगल में फिर से उस वातावरण में प्रवेश करे। इससे हीट शील्ड गर्म हो सकती है जिससे स्पेसक्राफ्ट जल सकता है। इससे अंतरिक्ष यात्रियों की जान को खतरा हो सकता है। इसी बीच नासा पर दबाव लगातार बढ़ रहा है क्योंकि सुनिता विलियम्स के साथ हेल्थ इश्यू है और उन्हें आई साइट की भी प्रॉब्लम है।
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