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Wednesday, March 11, 2026
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थाईलैंड-कंबोडिया के बीच सैन्‍य संघर्ष जारी, 27 लोगों की मौत, कंबोडिया ने तुरंत सीजफायर की मांग की

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा पर जारी सैन्य संघर्ष और तीव्र हो गया है। दोनों देशों के बीच हुई हिंसक झड़पों में अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद अब बेहद गंभीर रूप ले चुका है। दोनों देशों के बीच हुई हिंसक झड़पों में अब तक कुल 27 लोगों की जान जा चुकी है। सैन्य टकराव में लड़ाकू विमान, तोपखाने और जमीनी बलों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे हालात और अधिक बिगड़ते जा रहे हैं। कंबोडिया की ओर से 15 नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि सैकड़ों लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा है। उधर, थाईलैंड के स्वास्थ्य मंत्री ने जानकारी दी कि अब तक इस संघर्ष में 12 थाई नागरिक भी अपनी जान गंवा चुके हैं। 

तेजी से बिगड़ते हालात के बीच, कंबोडिया ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र में कंबोडिया के राजदूत चेया कियो ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमने संयुक्त राष्ट्र से बिना किसी शर्त के तुरंत युद्धविराम सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया है। साथ ही, हम इस विवाद का शांतिपूर्ण हल निकालने की मांग भी कर रहे हैं।”

चेया कियो ने थाईलैंड के उन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया जिनमें कंबोडिया को संघर्ष में आक्रामक बताया गया था। उन्होंने सवाल उठाया, “कैसे एक छोटा देश जैसे कंबोडिया, थाईलैंड जैसी बड़ी सैन्य शक्ति पर हमला कर सकता है?” उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने दोनों देशों से अधिकतम संयम बरतने और मामले का शांतिपूर्ण तथा कूटनीतिक समाधान निकालने का आग्रह किया है। कियो ने स्पष्ट किया, “हम भी यही उम्मीद रखते हैं और दोनों पक्षों से यही मांग करते हैं।”

थाईलैंड ने तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को ठुकराया

थाईलैंड ने कंबोडिया के साथ जारी सीमा विवाद को सुलझाने के लिए किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इसके बजाय, उसने सीधे द्विपक्षीय संवाद को प्राथमिकता देने की बात कही है। मीडिया से बातचीत में दो थाई अधिकारियों ने बताया कि थाई सरकार कंबोडिया के साथ सैन्य टकराव का समाधान खुद बातचीत के माध्यम से निकालना चाहती है। थाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता निकॉर्नडेज़ बालंकुरा ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि इस समय हमें किसी तीसरे देश की मध्यस्थता की जरूरत है।” उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका, चीन और मलेशिया (ASEAN के मौजूदा अध्यक्ष) ने विवाद सुलझाने के लिए मध्यस्थता का प्रस्ताव रखा था, लेकिन थाईलैंड फिलहाल खुद ही इस मसले का हल निकालने पर जोर दे रहा है।

हिंसक झड़पों में 15 मौतें, लाखों लोग विस्थापित

गुरुवार को शुरू हुई हिंसक झड़पों में अब तक कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। थाईलैंड के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी है कि सीमा से लगे थाई शहरों में तोपखाने की गोलाबारी के चलते 1 लाख 38 हजार से अधिक लोग सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किए गए हैं। एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, कंबोडियाई पक्ष में मारे गए लोगों में पांच सैनिक और आठ नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा, लगभग 35,000 लोग अपने घर छोड़कर विस्थापन के लिए मजबूर हुए हैं। थाईलैंड के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी 15 मौतों की पुष्टि की है, जिनमें 14 नागरिक और एक सैनिक शामिल है।

क्‍या है विवाद की वजह ?

यह संघर्ष थाईलैंड और कंबोडिया के बीच लगभग 800 किलोमीटर (500 मील) लंबी विवादित सीमा पर शुरू हुआ है, जिसने उस क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को फिर से उभार दिया है। यह इलाका हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है, लेकिन प्राचीन मंदिरों और रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण इलाक़ों पर दोनों देशों के बीच चल रहे लंबे समय से अनसुलझे विवाद इस हिंसा की जड़ हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच समय-समय पर छोटी-छोटी झड़पें होती रही हैं, लेकिन इस बार की लड़ाई पूरे क्षेत्र के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई है। इसके बावजूद, दोनों पक्षों ने अभी तक औपचारिक रूप से युद्ध की घोषणा नहीं की है।

मलेशिया की मध्यस्थता का प्रस्ताव और थाईलैंड का इनकार

आसियान के अध्यक्ष और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने गुरुवार को थाईलैंड और कंबोडिया के नेताओं से बात कर शांतिपूर्ण समाधान की अपील की है। इसके बावजूद, थाई विदेश मंत्रालय के उप मंत्री रस जलिचंद्र ने कहा कि वे मलेशिया की मध्यस्थता की सराहना करते हैं, लेकिन फिलहाल द्विपक्षीय बातचीत को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “हम किसी तीसरे पक्ष की मदद से इंकार नहीं करते, लेकिन अभी हमारा मानना है कि द्विपक्षीय संवाद के सारे विकल्प पूरी तरह से आजमाए नहीं गए हैं।” यह साफ है कि सीमा विवाद के बीच थाईलैंड कूटनीतिक स्तर पर अपनी शर्तों पर समाधान चाहता है। अब यह देखना बाकी है कि इस रुख के बाद दोनों देशों के बीच सीधे संवाद का रास्ता कब और कैसे खुलता है।

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