नई दिल्ली, रफ्तार न्यूजः जापान के भूकंप विशेषज्ञो ने दक्षिणी क्षेत्र में 7.1 तीव्रता के भूकंप से आठ लोगों के घायल होने के बाद एक संभावित “बड़े भूकंप” की चेतावनी दी है।
जापान मौसम विभाग एजेंसी (JMA) ने कहा की नए बड़े भूकंप की संभावना बड़ गई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसा भूकंप जरुर आएगा। यह चेतावनी 2011 के बड़े भूकंप के बाद बनाए गए एक नए सिस्टम के तहत दी गई है। एक सरकारी प्रवक्ता ने एक रिपोर्ट पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री फुर्मियो किशिदा इस चेतावनी के बाद अपनी मध्य एशिया की यात्रा रद्द कर सकते हैं।
गुरुवार के भूकंप के दौरान क्यूशू के दक्षिण द्वीप पर ट्रैफिक लाइट्स और कारे हिलनी लगी। कई चाजें गिरकर टूटने लगी मगर कोई भारी नुकसान नहीं हुआ।
फायर और डिजास्टर मैनैजमेंट एजेंसी ने कहा कि आठ लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ को गिरती हुई चीजों से चोट लगने लगी है।
जापान के 125 मिलियन लोग चार बड़े टेक्टोनिक प्लेट्स के ऊपर रहते है, जहां हर साल लगभग 1,500 भूकंप होते है, जिनमें से अधिकतर छोटे होते हैं।
यहां तक कि बड़े भूकंप भी जापान में ज्यादा नुकसान नही करते, क्योंकि यहां कि इमारतें मजबूत होती है औऱ लोगों को आपातकालीन स्थिति में कैसे काम करना है, इसकी अच्छी ट्रेनिंग दी जाती है।
सरकार ने पहले ही कहा था कि अगले 30 सालों में एक बड़े भूकंप की 70% प्रतिशत संभावना है।
इस तरह का भूकंप जापान के प्रशांत तट के एक बड़े हिस्से को प्रभावित कर सकता है और सबसे खराब स्थिति में करिबन 300,000 लोगो की जान को खतरा हो सकता है।
जापान में जोखिम बढ़ा तो है मगर कम
“हालांकि भूकंप की सटीक भविष्यवाणी करना मुश्किल है, लेकिन एक भूकंप के बाद दूसरे भूकंप का खतरा बढ़ जाता है,” अर्थक्वेक इनसाइट्स के विशेषज्ञों ने कहा।
लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि जब दूसरे भूकंप का खतरा बढ़ता है, तब भी वह बहुत कम ही होता है।
1 जनवरी को, नोटो प्रायद्वीप पर 7.6 तीव्रता के भूकंप और उसके बाद के झटकों ने तबाही मचाई, जिसमें कम से कम 318 लोग मारे गए, इमारतें गिर गईं और सड़कें टूट गईं।
2011 में, पूर्वोत्तर जापान के तट के पास समुद्र के नीचे 9.0 तीव्रता के बड़े भूकंप से आई सुनामी ने लगभग 18,500 लोगों की जान ले ली या वे लापता हो गए।
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