नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कुंभ मेला भारत की संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिकता का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि मानव जीवन के मिलन-बिछड़न, भावनाओं और रिश्तों का संगम भी है। यही वजह है कि बॉलीवुड हमेशा से कुंभ मेले से प्रेरित रहा है। इसकी कहानियों, रंगों और भावनाओं ने कई फिल्मों की कहानी को नया आयाम दिया है। खासकर मेले में बिछड़ने और मिलने की कहानियां हिंदी सिनेमा में बार-बार दिखाई गई हैं। जब बॉलीवुड के स्टार्स इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनते हैं, तो दर्शक इसे और भी करीब से महसूस कर पाते हैं।
अमर अकबर एंथनी (1977) – अमिताभ बच्चन, ऋषि कपूर और विनोद खन्ना स्टारर यह फिल्म आज भी भारतीय सिनेमा की क्लासिक मिसाल है। फिल्म की कहानी तीन भाइयों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बचपन में कुंभ मेले में बिछड़ जाते हैं। अलग-अलग धर्मों और परिवेश में बड़े होने के बावजूद उनकी किस्मत उन्हें फिर मिलाती है। कुंभ मेले वाला यह सीन इतना लोकप्रिय हुआ कि ‘कुंभ में बिछड़ना’ बॉलीवुड की कहानियों में एक आइकॉनिक घटना बन गया।
कुंभ के मेले (1950) – यह फिल्म अपने समय की सामाजिक और मानवीय कहानियों को बेहद संवेदनशील अंदाज में पेश करती है। फिल्म में कुंभ के दौरान घटने वाली घटनाओं और मानवीय भावनाओं को रियल लाइफ और रील लाइफ के बीच गहरे कनेक्शन के साथ दिखाया गया है। दर्शक मेले की भीड़, आस्था और रोमांच का अनुभव इस फिल्म के माध्यम से महसूस कर सकते हैं।
धर्मात्मा (1975) – रेखा और हेमा मालिनी अभिनीत इस फिल्म में कुंभ मेले का एक भावुक दृश्य है। फिल्म में एक परिवार मेले में बिछड़ जाता है और दर्शक इसे देखकर भावुक हो जाते हैं। इस फिल्म ने कुंभ मेला केवल धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि रिश्तों और मानवीय भावनाओं के प्रतीक के रूप में पेश किया।
तकदीर (1943) – यह फिल्म कुंभ मेले की कहानी को रोमांटिक और भावनात्मक अंदाज में पेश करती है। बद्रीप्रसाद का बेटा पप्पू और जज जुमना प्रसाद की बेटी श्यामा कुंभ मेले में खो जाते हैं। पूरी कहानी इसी खोने और मिलने के इर्द-गिर्द घूमती है। दर्शक इनके संघर्ष और मिलने की यात्रा को बेहद भावुक होकर देखते हैं।
सोल्जर (1998) – बॉबी देओल और जॉनी लीवर की यह फिल्म भी कुंभ मेला का मजेदार पहलू दिखाती है। जॉनी लीवर का डायलॉग, “कुंभ के मेले में मेरा भाई सोहन बिछड़ गया था,” दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ कुंभ मेला याद दिलाता है। फिल्म में कॉमेडी और भावनाओं का यह मिश्रण मेले की महत्ता को शानदार ढंग से दर्शाता है।
अंदाज अपना-अपना (1994) – आमिर खान, सलमान खान, रवीना टंडन और करिश्मा कपूर स्टारर इस कॉमेडी फिल्म में कुंभ मेले का मजेदार जिक्र किया गया। यह छोटा सा सीन दर्शकों को गुदगुदाने वाला था और हल्की-फुल्की मनोरंजन के साथ मेले का अनुभव भी जोड़ता है।
तुझे मेरी कसम (2012) – रितेश देशमुख और जिमी शेरगिल स्टारर इस फिल्म में कुंभ मेला कहानी का हिस्सा है। एक डायलॉग में पूछा जाता है, “कहीं कुंभ के मेले में तो नहीं बिछड़ गए थे? ऐसे अजनबी से क्यों लगते हो…”। यह डायलॉग दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ कुंभ मेला याद दिलाने वाला है।
लक्ष्मी बॉम्ब (2020) – अक्षय कुमार की यह फिल्म भी कुंभ मेले का जिक्र करती है। फिल्म का डायलॉग, “कुंभ के मेले में जो खो गया, उसे फिर से ढूंढ पाना मुश्किल है, लेकिन यादें हमेशा साथ रहती हैं,” दर्शकों के दिल को छू गया।





