नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । हिंदी सिनेमा में कुछ ही ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने सिर्फ शोहरत नहीं, बल्कि लोगों का भरोसा और दिल भी जीता है। इन्हीं में एक नाम है सोनू सूद का। जो फिल्मों में विलेन बनकर नजर आए, लेकिन असल जिंदगी में लाखों लोगों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं हैं। आज सोनू सूद अपना जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर जानते हैं उस शख्स की कहानी, जिसने संघर्ष के दिनों में एक कमरे में 12 लोगों के साथ रहकर जिंदगी शुरू की, और आज नेशनल हीरो बनकर हर जरूरतमंद की मदद के लिए आगे रहते हैं।
जेब में सिर्फ 5500 रुपये लेकर पहुंचे थे मुंबई
30 जुलाई 1973 को जन्मे सोनू सूद एक मध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं। उनके पिता की एक कपड़ों की छोटी सी दुकान थी, जिससे घर का खर्च चलता था। हर मिडिल क्लास परिवार की तरह उनके घरवालों की भी यही ख्वाहिश थी कि बेटा पढ़-लिखकर घर की जिम्मेदारी संभाले। इसी उम्मीद के साथ सोनू को इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला दिलवाया गया। यहां उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की।
कॉलेज के दिनों में सोनू सूद ने बेहद साधारण और संघर्षपूर्ण जीवन जिया। वह एक ही कमरे में 12 लड़कों के साथ रहते थे और घर से मिलने वाले पैसों को भी बचाने की कोशिश करते थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मॉडलिंग की ओर रुख किया और फिर साल 1996 में सिर्फ 5500 रुपये लेकर अभिनेता बनने का सपना लिए मुंबई पहुंच गए।
तमिल फिल्मों से की शुरुआत
सोनू सूद ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत साल 1999 में तमिल फिल्मों से की थी। इसके बाद उन्होंने साउथ की कई फिल्मों में अहम भूमिकाएं निभाईं। साल 2002 में उन्होंने हिंदी सिनेमा में ‘शहीद-ए-आजम’ फिल्म के जरिए एंट्री की। आज सोनू सूद किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वे एक अभिनेता से बढ़कर लोगों के दिलों में बसने वाले मसीहा बन चुके हैं। बता दें कि कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन में उन्होंने जिस तरह जरूरतमंदों की मदद की, उससे उन्हें ‘नेशनल हीरो’ का दर्जा मिला। अब हर साल उनके जन्मदिन पर देशभर से फैंस उनके घर के बाहर पहुंचते हैं और उन्हें ढेरों शुभकामनाएं देते हैं।




