नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । बॉलीवुड की सदाबहार अभिनेत्री और खूबसूरती की मिसाल रेखा आज 71 साल की हो गईं। फिल्मों में अपनी अदाकारी, नज़ाकत और दिल छू लेने वाली मुस्कान से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली रेखा का असली नाम भानुरेखा गणेशन है। लेकिन इस नाम के पीछे की कहानी जितनी दिलकश है, उतनी ही दिल दहला देने वाली भी रेखा की जिंदगी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी लगती हैजिसमें दर्द है, संघर्ष है, और अंततः एक शानदार सफलता भी। आज उनके जन्मदिन पर जानते हैं, कैसे एक छोटी-सी लड़की ने परिवार की मजबूरियों के बीच अपने सपनों की उड़ान भरी, और कैसे वह हिंदी सिनेमा की सबसे चमकदार सितारों में शुमार हो गईं।
बचपन से ही दर्द की छाया में रही रेखा की जिंदगी
10 अक्टूबर 1954 को मद्रास (अब चेन्नई) में जन्मी रेखा का जीवन शुरू से ही आसान नहीं रहा। उनके माता-पितादक्षिण भारत के प्रसिद्ध अभिनेता जेमिनी गणेशन और अभिनेत्री पुष्पावल्लीविवाहित नहीं थे। यह बात रेखा के जीवन पर एक लंबी छाया बन गई। न समाज ने उन्हें अपनाया, न ही पिता ने। पिता ने कभी बेटी को नाम या साथ नहीं दिया। रेखा ने कई बार खुलकर कहा कि उन्हें अपने पिता से कभी कोई अपनापन नहीं मिला। स्कूल में बच्चों से ताने सुनने पड़ते थे। घर की आर्थिक हालत इतनी खराब थी कि माँ ने उन्हें महज 13-14 साल की उम्र में फिल्मों में काम करने को मजबूर किया।
बचपन छीना, आत्महत्या की कोशिश, फिर खुद से लड़ने की ठानी
रेखा ने अपने एक इंटरव्यू में यह भी बताया कि किशोरावस्था में उन्होंने आत्महत्या की कोशिश की थी। जब डॉक्टरों ने उन्हें बचाया, तो मां ने दो विकल्प दिए या तो शादी कर लो, या फिल्मों में काम करो। और रेखा ने दूसरा रास्ता चुना। मुंबई की चमक-धमक भरी दुनिया में कदम रखना आसान नहीं था। कम उम्र में फिल्म स्टूडियो की दौड़, भाषा की दिक्कतें, और शूटिंग के दौरान बार-बार शोषण जैसी घटनाओं ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया। एक फिल्म के सेट पर अभिनेता ने बिना इजाजत कैमरे के सामने लंबा किस किया, जिससे वह स्तब्ध रह गईं। उनकी आंखों में आंसू आ गए लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा।
सावन भादों से चमकी किस्मत, संघर्ष बनी सफलता की सीढ़ी
1969 में फिल्म ‘सावन भादों’ से उन्होंने हिंदी सिनेमा में डेब्यू किया। यही फिल्म उनकी किस्मत बदलने वाली साबित हुई। इसके बाद ‘घर’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘खूबसूरत’, ‘सिलसिला’, ‘खून भरी मांग’ जैसी फिल्मों ने उन्हें शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा दिया। ‘खूबसूरत’ फिल्म के लिए उन्हें पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। ‘खून भरी मांग’ जैसी महिला-केंद्रित फिल्मों से उन्होंने दिखा दिया कि वह सिर्फ सुंदर ही नहीं, एक दमदार अभिनेत्री भी हैं।
बॉलीवुड की ‘अनकही’ प्रेम कहानी का हिस्सा बनीं रेखा
रेखा की जिंदगी में एक और मोड़ तब आया, जब उनका नाम सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के साथ जुड़ा। ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘सिलसिला’ और ‘सुहाग’ जैसी फिल्मों में दोनों की जोड़ी ने पर्दे पर आग लगा दी। लेकिन इस रिश्ते ने जितनी सुर्खियां बटोरीं, उतना ही रहस्य भी बना रहा। आज भी यह प्रेम कहानी अधूरी और अनकही ही रह गई।
सांसद बनीं, फिर भी रही खुद में गुम
रेखा ने 2012 से 2018 तक राज्यसभा सांसद के रूप में भी देश सेवा की। लेकिन उन्होंने राजनीति में कभी ज्यादा सक्रिय भूमिका नहीं निभाई। वह हमेशा से एक रहस्यमयी व्यक्तित्व रही हैंचमक-दमक की दुनिया में रहते हुए भी अपने भीतर के अकेलेपन को छिपाती रहीं। रेखा ने शादी तो की लेकिन वह भी दुखद रही। उनके पति मुकेश अग्रवाल ने शादी के कुछ महीनों बाद ही आत्महत्या कर ली। इसके बाद रेखा ने अपने निजी जीवन को पूरी तरह से लोगों से दूर रखा।
आज भी हैं जवां दिलों की धड़कन
70 की उम्र में भी रेखा की खूबसूरती लोगों को हैरान कर देती है। वह चाहे किसी अवॉर्ड शो में नजर आएं या किसी फैशन मैगजीन के कवर पर, उनकी मौजूदगी हर बार सबको हैरान कर देती है। आज भी वह कई नई अभिनेत्रियों को सुंदरता और ग्रेस में पीछे छोड़ देती हैं।
एक मिसाल, एक प्रेरणा
रेखा सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं, एक मिसाल हैं। उन्होंने साबित किया कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादा पक्का हो तो कोई भी मुकाम पाया जा सकता है। संघर्षों से निकली रेखा आज भी बॉलीवुड की सबसे रहस्यमयी, सबसे मोहक और सबसे आदरणीय अभिनेत्री मानी जाती हैं।





