नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। महेश भट्ट हिंदी सिनेमा के एक प्रसिद्ध प्रोड्यूसर और डॉयरेक्टर हैं, जिन्होंने कई हिट फिल्में दी हैं। वे लीक से हटकर फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं और उन्होंने कई अभिनेताओं के करियर को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महेश भट्ट इंडस्ट्री के सबसे चर्चित नामों में से एक हैं और आज अपना 76वां बर्थडे मना रहे हैं। बर्थडे के अवसर पर आज हम आपको महेश भट्ट के जीनव के अनकहे किस्से बताएंगे।
जन्म और शुरुआती जीवन
महेश भट्ट का जन्म 20 सितंबर 1948 को मुंबई में हुआ। उनके पिता का नाम नानाभाई भट्ट और मां का नाम शिरीन मोहम्मद अली है। महेश ने अपनी स्कूलिंग डॉन बॉस्को हाई स्कूल से की और बहुत छोटी उम्र में काम करना शुरू कर दिया।
करियर की शुरुआत
महेश भट्ट ने अपने करियर की शुरुआत महज 20 साल की उम्र में विज्ञापनों के लिए लिखकर की। इसके बाद उन्होंने स्मिता पाटिल और विनोद खन्ना के सेक्रेटरी के तौर पर काम किया। महेश ने 26 साल की उम्र में फिल्म ‘मंजिलें और भी हैं’ से निर्देशन की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कई सफल फिल्में बनाईं जैसे ‘आशिकी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, और ‘हम हैं राही प्यार के’।
महेश भट्ट की पहली शादी
महेश भट्ट की पहली शादी लॉरेन ब्राइट से हुई, जिन्होंने बाद में अपना नाम किरण भट्ट रख लिया। उनकी शादी 20 साल की उम्र में हुई थी। इस शादी से उन्हें दो बच्चे, पूजा भट्ट और राहुल भट्ट हुए, लेकिन उनकी शादी में मुश्किलें आई और वे अलग हो गए। इसके बाद, महेश ने सोनी राजदान से शादी की, जिससे उन्हें दो बेटियाँ, आलिया भट्ट और शाहीन भट्ट हुईं। उनकी जिंदगी में हमेशा विवादास्पद रिश्ते रहे हैं, जिनके पीछे उनका बचपन का दर्द है। महेश भट्ट की मां शिरीन मोहम्मद अली मुस्लिम थीं और पिता नानाभाई भट्ट हिंदू थे, लेकिन उनके पिता ने कभी उनकी मां से शादी नहीं की। महेश का बचपन मुश्किलों से भरा रहा, और कभी-कभी उनके रिपोर्ट कार्ड पर उनके मामा साइन करते थे।
महेश और लॉरेन की मुलाकात स्कूल के दिनों में हुई थी। उस समय लॉरेन ने YWCA में टाइपिस्ट बनने की ट्रेनिंग ली थी, जबकि महेश विज्ञापनों में काम कर रहे थे।
परवीन बाबी के साथ लिव इन रिलेशनशिप, बिना तलाक की दूसरी शादी
हालांकि, महेश और किरण के रिश्ते में दरार आ गई। महेश की फिल्में फ्लॉप होने लगीं और उन्होंने परवीन बाबी के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का फैसला किया। महेश ने किरण को तलाक नहीं दिया, लेकिन दोनों अलग हो गए। परवीन की मानसिक हालत खराब हो गई, और 1979 में महेश ने उन्हें छोड़ दिया।
कुछ समय बाद महेश वापस किरण के पास लौटे, और 1982 में उनका बेटा राहुल पैदा हुआ। लेकिन महेश ने फिर से किरण को अपनी जिंदगी में पूरी तरह से नहीं लिया। 1989 में उन्होंने सोनी राजदान से शादी कर ली। महेश और सोनी की मुलाकात फिल्म ‘सारांश’ के सेट पर हुई थी, और महेश ने कभी किरण को तलाक नहीं दिया, लेकिन सोनी से शादी कर ली।
महेश भट्ट का योगदान
महेश भट्ट ने न केवल फिल्में बनाई, बल्कि अपने व्यक्तिगत अनुभवों से कहानियाँ भी लिखीं। उनकी फिल्में उनके जीवन की घटनाओं से प्रेरित होती हैं। आज, महेश भट्ट का सिनेमा में एक विशेष स्थान है और उनकी कहानियाँ आज भी दर्शकों को आकर्षित करती हैं।





