नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। स्वर कोकिला लता मंगेशकर की बहन उषा मंगेशकर का जन्म 15 दिसंबर 1935 को मध्यप्रदेश में हुआ था। आज उषा मंगेशकर 89 साल की हो चुकी हैं। उनका संगीत करियर बहुत ही शानदार और विविधतापूर्ण रहा है। उन्होंने कई भाषाओं में गाने गाए हैं और भारतीय संगीत जगत में अपनी एक खास पहचान बनाई है।
संगीत में करियर की शुरुआत
उषा मंगेशकर ने 1954 में फिल्म सुबह का तारा से बॉलीवुड में कदम रखा था। उनका पहला गाना था बड़ी धूमधाम से मेरी भाभी आई, जो एक रोमांटिक ड्रामा सॉन्ग था। इसके बाद उषा ने हिंदी, मराठी, बंगाली, भोजपुरी, नेपाली, कन्नड़ और असमिया जैसी भाषाओं में भी गाने गाए।
महत्वपूर्ण गाने और सफलता
उषा मंगेशकर का करियर 1975 में फिल्म जय संतोषी मां से नया मोड़ लिया जिसमें उन्होंने मैं तो आरती गाया। यह गाना घर-घर में प्रसिद्ध हो गया और उषा मंगेशकर की पहचान बना। इसके बाद उन्हें कई पुरस्कार भी मिले जिनमें फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का नामांकन भी शामिल था।
लोक संगीत और अन्य योगदान
उषा मंगेशकर को लोक संगीत का गहरा शौक था। 1992 में उन्होंने दूरदर्शन के लिए म्यूजिकल ड्रामा फूलवतीं को प्रोड्यूस किया जो बाबा साहेब पुरंदरे की कहानी पर आधारित था। इसके अलावा उन्होंने कई फिल्मी गानों के साथ साथ अपने संगीत के लिए भी काम किया।
रिमिक्स के खिलाफ
उषा मंगेशकर को पुराने गानों के रिमिक्स से नफरत थी। उन्होंने खुद इस बात का इजहार किया कि वह पुराने गानों के रिक्रिएशन को पसंद नहीं करतीं। एक प्रसिद्ध गाना मुंगड़ा जो उन्होंने फिल्म इनकार में गाया था उसे बाद में फिल्म टोटल धमाल में रिक्रिएट किया गया था लेकिन उषा इस पर खुश नहीं थीं।
उषा मंगेशकर ने सिंगिंग के 60 साल से अधिक का सफर तय किया है। उनका संगीत भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लिए अनमोल धरोहर है। चाहे वह फिल्म इजाजत हो या काला पत्थर उषा मंगेशकर ने अपनी मधुर आवाज से हर गाने को खास बना दिया। आज भी उनकी आवाज लोगों के दिलों में बसती है।




